सैन्यकर्मियों के लिए विकलांगता संबंधी पेंशन के नए नियम लाएगी सरकार


नयी दिल्ली : सरकार ने फैसला किया है कि वह ड्यूटी के दौरान घायल हुए थलसेना, नौसेना और वायुसेना के कर्मियों को विकलांगता पेंशन देने के लिए मौजूदा ‘विसंगतियों’ को दूर करेगी और प्रतिशत आधारित एक विशिष्ट व्यवस्था लेकर आएगी। यह फैसला सैन्य बलों की लंबे समय से लंबित इस मांग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है कि विकलांगता पेंशन तय करने की मौजूदा प्रणाली को ठीक किए जाने की जरूरत है।

नई स्लैब आधारित प्रणाली को दिया अंतिम रूप
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि सरकार ने एक नई स्लैब आधारित प्रणाली को अंतिम रूप दिया है। इस प्रणाली का उद्देश्य सैन्य बलों की अधिकांश चिंताओं को दूर करने पर लक्षित है। इससे सरकार के खिलाफ मुकदमों की संख्या में कमी आने की संभावना है। मौजूदा प्रणाली के तहत, 100 प्रतिशत विकलांगता वाले लोगों को अंतिम वेतन के 30 प्रतिशत में से महंगाई भत्ते को निकाल दिए जाने पर जो राशि बनती है, वह विकलांगता की पेंशन के रूप में दी जाती है। पेंशन की राशि चोट के प्रतिशत के आधार पर कम हो जाती है।

75% से अधिक विकलांगता वाले कर्मियों को 100% विकलांग माना जाएगा
सूत्रों का कहना है कि प्रभावित कर्मी चोट की व्यापकता का पता लगाने में कथित असंगतियों का आरोप लगाते हुए अक्सर कानूनी कदम उठाते हैं। नई स्लैब आधारित व्यवस्था में 20-25 प्रतिशत विकलांगता वाले सुरक्षा कर्मियों को 50 प्रतिशत विकलांग माना जाएगा। जबकि 50-75 प्रतिशत का कोष्ठक 75 प्रतिशत विकलांग की श्रेणी में आएगा। 75 प्रतिशत से अधिक विकलांगता वाले कर्मियों को 100 प्रतिशत विकलांग माना जाएगा।

विकलांगता पेशन को तीन श्रेणियों में रखा जाएगा
इस तरह विकलांगता पेशन के पात्र सभी लोगों को मुख्य तौर पर तीन श्रेणियों में रखा जाएगा और इस हिसाब से पेंशन तय की जाएगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह एक मजबूत प्रणाली होगी और सशस्त्र बलों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों को दूर करेगी।” नई प्रणाली के बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा, “50 प्रतिशत विकलांगता वाले किसी भी व्यक्ति को मौजूदा प्रक्रिया में 100 प्रतिशत विकलांगता वाले व्यक्ति को मिलने वाली पेंशन से आधी पेंशन मिलेगी।”

सरकार ने एक जनवरी 2006 को उन लोगों को विकलांगता पेंशन देनी शुरू की थी, जिन्होंने ड्यूटी के दौरान चोटें आ जाने के कारण समय से पूर्व सेवानिवृति ले ली थी। विकलांगता के आकलन संबंधी ये बदलाव सेना के पूर्व एडजूटैंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) मुकेश सब्बरवाल की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं। समिति के गठन के पीछे का मुख्य उद्देश्य ऐसे उपाय सुझाना था, जो विभिन्न अदालतों में विकलांगता पेंशन से जुड़े विभिन्न मुकदमों और विवादों को कम कर सकें।