GST फेरबदल : कपड़ा उद्योग और जॉब वर्क को मिली बड़ी राहत


GST काउंसिल ने बैठक के बाद टेक्सटाइल उद्योग और ट्रैक्टर पार्टस पर बड़ी राहत दी है। GST काउंसिल ने शनिवार को 19 सेवाओं की टैक्स दरें बदल दीं। बता दे कि इनमें टेक्सटाइल सेक्टर में मौजूदा जॉब वर्क रेट को 18% से घटाकर 5% करना भी शामिल है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने व्यापारियों से टैक्स सुधार के इस बड़े कदम से हो रहा फायदा ग्राहकों को भी देने की अपील की। काउंसिल ने हर तरह के कपड़े पर होनेवाले सभी काम पर लगनेवाले टैक्स की दर घटाई है। हालांकि, टेक्सटाइल इंडस्ट्री कढ़ाई, बुनाई, रंगाई, छपाई, धुलाई, सिलाई, आयरन समेत कपड़ों से जुड़े अन्य सभी कामों पर टैक्स की दर घटाने की मांग कर रही थी। बैठक में ट्रैक्टर्स के विशेष पार्टस पर भी GST को 28 % से घटाकर 18 % कर दिया गया है।

राजधानी में आयोजित अपनी 20वीं बैठक में GST काउंसिल ने ई-वे बिल के नियमों को भी मंजूरी दे दी ताकि सामानों की ढुलाई और सहज हो। नियमों में स्पष्ट किया गया है कि अगर 50,000 रुपये से ज्यादा कीमत का वस्तु बिक्री के लिए 10 कि.मी. से ज्यादा दूरी तक ले जाया जाता है तो पहले उसका रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। लेकिन, यह नियम उन वस्तुओं पर लागू नहीं होगा जिनपर GST नहीं लग रहा है। ई-वे नियम 1 अक्टूबर से लागू हो सकता है। इससे इंस्पेक्टर राज का खात्मा हो जाएगा क्योंकि बड़े पैमाने पर इसकी प्रक्रिया तकनीकी आधारित होगी। जेटली ने मीटिंग के बाद कहा, ‘काउंसिल ने पूरे देश में ई-वे बिल लागू करने का फैसला किया है। एक भी चकेपोस्ट नहीं होगा और पूरी प्रक्रिया तकनीकी आधारित होगी।’

कयास लगाए जा रहे हैं कि अगली बैठक में कई वस्तुओं पर GST की दरें घटाई जा सकती हैं। टेक्सटाइल उद्योग को मिली रहात इस लिहाज से अहम है क्योंकि यह क्षेत्र बड़े स्तर पर रोजगार दिलाता है। इस टेक्यटाइल उद्योग में एंब्रॉयडरी भी शामिल है।

किसानों को राहत देने के लिए फसल कटाई के बाद और भंडारण से जुड़ी कृषि सेवाओं को 18% की जगह 12% टैक्स रेट के तहत लाया गया है। प्लैनेटेरियम में प्रवेश पर भी अब 28% की जगह 18% टैक्स कर दिया गया है।

वही हाल में टेक्सटाइल उद्योग की ओर से GST की दरों को लेकर गुजरात, महाराष्ट्र और देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुआ था। अरुण जेटली ने कहा कि सरकार सिंचाई तथा ड्रेनेज जैसे कार्यों के लिए जो वर्क्स कांट्रैक्ट देती है उस पर भी GST की दर 18 % से घटाकर 12 % कर दिया गया है।

देश में GST के मद्देनजर इनपुट क्रेडिट हासिल करने वाले उत्पादों की कीमतों में कमी नहीं करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है क्योंकि GST परिषद ने राज्यों और केंद्र को मुनाफाखोरी रोकने के लिए समिति बनाने को मंजूरी दे दी है। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने संवाददाताओं से चर्चा में उद्योग जगत एवं कारोबारियों से जीएसटी के मद्देनजर मिलने वाले इनपुट क्रेडिट का लाभ उपभोक्ताओं को देने की अपील की। उन्होंने बताया कि जीएसटी परिषद ने मुनाफाखोरी रोकने के लिए केंद्र एवं राज्यों में समिति बनाने को मंजूरी दे दी है। यदि इनपुट क्रेडिट के लाभ को उपभोक्ताओं को नहीं दिया जाएगा तो मजबूरन चयन समिति का गठन करना पड़ेगा।

वही काउंसिल की अगली बैठक हैदराबाद में 9 सितंबर को होगी।