जातीय हिंसा की आग गुजरात पहुंची, दलित सेना ने किया हाईवे जाम


पुणे में ‘भीमा-कोरेगांव’ की लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर आयोजित हुए एक कार्यक्रम के दौरान दो गुट आपस में भिड़ गए। ये मामला थमने का नाम ही नहीं ले रहा हैं हिंसा का असर अब पड़ोसी राज्य गुजरात में भी देखने को मिल रहा है। भीमा-कोरेगांव लड़ाई की सालगिरह पर भड़की चिंगारी पूरे महाराष्ट्र में फैल चुकी। हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हुई। अब वालसाड के वापी में भी दलित सेना ने बुधवार को हाईवे जाम कर टायरों का आग के हवाले कर।

गुजरात के नदुरबार से नासिक जाने वाली बसों को भी रोक दिया गया। यहां दलित सेना महाराष्ट्र में मराठाओं और दलित के बीच हुए जातीय संघर्ष के खिलाफ सड़क पर उतरी। संसद से लेकर सड़कों पर इस घटना का असर देखने को मिल रहा। सदन में आज इस मामले को लेकर जमकर हंगामा। महाराष्ट्र++++++ सरकार ने इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए। हिंसा के खिलाफ बुधवार को कई संगठनों ने बंद बुलाया। हिंसा के बाद मुंबई के मशहूर डब्बावालों ने भी अपनी सेवाएं बंद रखने का फैसला किया । इसके अलावा महाराष्ट्र बंद के कारण स्कूल बसों की सर्विस बंद रहेगी. मुंबई में करीब 40,000 स्कूल बस बंद रहेंगी, स्कूलों ने अभिभावकों से अपने वाहन से ही बच्चों को स्कूल छोड़ने को कहा गया।

क्या है हिंसा की वजह

दलित समुदाय के इस सालगिरह कार्यक्रम में गुजरात के नवनिर्वाचित विधायक जिग्नेश मेवाणी, उमर खालिद, प्रकाश अंबेडकर और राधिका वेमुला मौजूद थे। माना जा रहा है कि दलित और मराठा समुदाय के लोग आपस में भिड़ गए। फिर यहीं से झड़प हिंसक की शुरुआत हो गई। तेज होते प्रदर्शन को देखते हुए मुंबई में स्कूल-कॉलेजों को बंद करना पड़ा। भारिपा बहुजन महासंघ के राष्ट्रीय नेता प्रकाश अंबेडकर समेत दलित ग्रुप ने बुधवार को महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया है। हालांकि उन्होंने इसे जातीय हिंसा नहीं माना है। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के कार्यकर्ता पुणे में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

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