हार्दिक पटेल के संगठन में बगावत के आसार


अहमदाबाद : हार्दिक पटेल की अगुवाई वाली पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति यानी पास में आज एक बार फिर बगावत के स्वर बुलंद होते दिखे और संगठन की फायरब्रांड महिला नेता रेशमा पटेल तथा एक अन्य प्रमुख नेता अतुल पटेल ने आज ही कथित तौर पर मनमाने ढंग से गठित इसके तीन संयोजकों की समिति के साथ ही साथ मौजूदा कोर कमिटी को भी भंग करने की खुली मांग कर डाली।

रेशमा, जो संगठन के सौराष्ट्र क्षेत्र की महिला संयोजक हैं, और अतुल, जिन्होंने हार्दिक की नौ माह की जेल बंदी तथा बाद में जमानत की शर्त के अनुरूप छह माह तक गुजरात से बाहर रहने के दौरान आंदोलन को जीवंत बनाये रखने में खासी भूमिका निभायी थी, ने आज एक खुले पत्र में हार्दिक से मौजूदा कोर कमेटी को तत्काल भंग करने तथा एक बैठक बुला कर सर्वसम्मति से नयी समिति गठित करने की मांग की है।

दोनो ने एक खुले पत्र में कहा है कि दिनेश बांभणिया, वरूण पटेल और मनोज पनारा की तीन सदस्यीय समिति जिसका गठन मनमाने ढंग से किया गया है, को पाटीदार अथवा पटेल समुदाय का समर्थन नहीं है। इसे विभिन्न राजनीतिक दलों से बातचीत के लिए गठित गया है पर इन दलों को भी समझ लेना चाहिए कि इनसे बातचीत समय की बर्बादी होगी।
रेशमा ने कहा है कि नयी समिति में महिलाओं तथा समुदाय के विश्वासपात्र अन्य लोगों को भी जगह दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पाटीदार आंदोलन पूरे समुदाय का है न कि केवल तीन लोगों तक सीमित है। उधर अतुल पटेल ने बाद में यूनीवार्ता से कहा कि कुछ लोगों के मनमाने बर्ताव के चलते आंदोलन ठंडा पड गया है। अगर सही लोगों को दरकिनार किया जायेगा तो आंदोलन उस तरह नहीं चल सकता जैसे इसे चलना चाहिए। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि संभव है कि हार्दिक को इन बातों की जानकारी नहीं हो।

ज्ञातव्य है कि पिछले साल हार्दिक के कई पूर्व करीबी सहयोगियों, जिनमें उनके साथ राजद्रोह के मामले में सह अभियुक्त के तौर जेल जा चुके चिराग और केतन पटेल भी शामिल हैं, ने उनके खिलाफ बगावत कर दिया था। चिराग और केतन ने तो हार्दिक पर आंदोलन के लिए जमा किये गये पैसे का निजी इस्तेमाल का भी आरोप लगाया था।

गुजरात में राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से खासे मजबूत पटेल समुदाय को आरक्षण दिलाने की मांंग को लेकर वर्ष 2015 में पास के राज्यव्यापी आरक्षण आंदोलन के दौरान ङ्क्षहसा में एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गयी थी तथा अरबों की सरकारी संपत्ति जिनमें 200 से अधिक सरकारी बसें शामिल हैं, जला दी गयी थी।

– (वार्ता)