नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गाँधी बना गुजराती चुनाव


modi vs rahul

गुजरात चुनावी रंग में डूब चुका है। यह चुनाव इस बार खास इसलिए है कि नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद वहां पहली बार चुनाव हो रहे हैं। गृह राज्य होने की वजह से यहां के चुनावी नतीजों का उनकी प्रतिष्ठा से जुड़ना स्वाभाविक है। कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात के ताबड़तोड़ प्रचार दौरों से जो माहौल बनाया है, उसकी धमक पूरे चुनाव प्रचार के दौरान सुनाई देती रहे। कांग्रेस गुजरात की चुनावी चौसर पर कितने सोच समझ कर पांसे फेंक रही है, इसका सबूत है राहुल कहीं भी गुजरात चुनाव दौरों के वक्त ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की लाइन से अलग होते नहीं दिखे। कांग्रेस गुजरात में अपनी खोई जमीन को दोबारा हासिल करने के लिए जहां हाथ-पैर मार रही है वहीं पार्टी से बाहर के युवा तुर्कों के जरिए बीजेपी को घेरने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रही। लेकिन साथ ही इस बात का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है कि कांग्रेस के किसी नारे या जुमले को बीजेपी को मुद्दा बनाने का मौका ना मिले।

कांग्रेस को 2007 गुजरात विधानसभा चुनाव का कड़वा अनुभव अभी तक याद है। तब सोनिया गांधी की ओर से कहे शब्दों ‘मौत का सौदागर’ को तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी ने उस चुनाव में इस कदर भुनाया कि कांग्रेस चारों खाने चित नजर आई । गुजरात चुनाव प्रचार में इस बार शुरू में ‘विकास गांडो थायो छे’ (विकास पागल हो गया है) की काफी गूंज सुनाई दी। लेकिन ऐसे शब्दों का सारा सियासी नफा-नुकसान जोड़कर कांग्रेस और राहुल ने प्रचार में इससे तौबा कर लेने में ही अपनी भलाई समझी। गुजरात की सियासी लड़ाई ‘मोदी बनाम राहुल’ की तरह प्रेजेंट ना की जाए इसके लिए कांग्रेस फूंक-फूंक कर कदम उठा रही है।

खुद राहुल पार्टी नेताओं को प्रधानमंत्री मोदी पर व्यक्तिगत और तीखी टिप्पियों से परहेज रखने की नसीहत दे चुके हैं। राहुल गुजरात की सियासी जंग को ‘बीजेपी बनाम गुजरात की जनता’ का नाम दे रहे हैं, साथ ही कह रहे हैं कांग्रेस जनता के साथ है। राहुल ने गुजरात में व्यापार और नौकरियों को ही भाषण के केंद्र में रखा है। यही वजह है कि वो मोदी सरकार के नोटबंदी और जीएसटी लागू करने के फैसलों पर ही सबसे ज्यादा प्रहार करते रहे हैं। राहुल के नारों में ‘जय सरदार’ और ‘जय भवानी’ सुनकर भले ही अचरज होता हो, लेकिन सियासी लिहाज से राहुल ऐसा करते नजर आते हैं।

राहुल गांधी मोदी सरकार के खिलाफ ‘5-10 उद्योगपतियों को फायदा और सब परेशान’ का नारा देकर वोट बैंक पर निशाना साधते नजर आए। अब ये रणनीति है या कुछ और लेकिन राहुल इस बार चुनाव प्रचार में लोगों से ज्यादा घुलने मिलने की कोशिश करते नजर आए। बच्चों के साथ सेल्फी हो या उन्हें टॉफियां बांटना, आदिवासियों के बीच जाकर उनके साथ फोटो खिंचवाना, ये सब कुछ राहुल के नए अंदाज की बानगी रहा। चुनावी दौरों के समय राहुल का लोगों से सीधे संवाद कायम करना, सवाल-जवाब करना, ये सब वो बातें हैं जिन्होंने राहुल के भाषणों को नई धार दी। राहुल रात को सामान्य गुजराती ढाबों और रेस्टोरेंट में गुजराती खाना खाते दिखे तो सुबह को गुजराती चाय, खाखड़ा, फाफड़ा का नाश्ता करते भी नजर आए।

सोशल मीडिया पर 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कितनी धाक जमाई थी, इससे सबक लेते हुए कांग्रेस इस चुनाव में ट्विटर और फेसबुक के जरिए प्रचार में भी कोई कसर नहीं छोड़ रही। राहुल लोगों से ये कहते भी नजर आते हैं कि बीजेपी ने खासतौर पर उनकी छवि खराब करने के लिए ही 200 लोगों को सोशल मीडिया पर तैनात कर रखा है। कांग्रेस गुजरात चुनाव में अपनी जीत को लेकर कितनी आश्वस्त है ये इसी से पता चलता है कि पार्टी इंटरनल सर्वे में खुद को गुजरात में 120 सीट पर जीत मिलने का दावा करते नहीं थक रही। कांग्रेस पाटीदार नेता हार्दिक पटेल, ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर और दलित नेता जिग्नेश मेवाणी के अपने साथ आने को भी बड़ी कामयाबी की तरह पेश कर रही है।

कांग्रेस इस रणनीति पर काम कर रही है कि ये युवा तिकड़ी खुल कर पार्टी के प्रचार के लिए आगे आए जिससे कि इनके समुदायों की बीजेपी को लेकर नाराजगी को भुनाया जा सके। इन समुदायों के अलावा कांग्रेस आदिवासी वोटों को साधने के लिए भी पूरा जोर लगाए हुए है। कांग्रेस की कोशिश राहुल के ‘सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड’ और PODA (पाटीदार, ओबीसी, दलित, आदिवासी) के जरिए चुनावी नैया पार लगाने की है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस 16 नवंबर को गुजरात के पहले चरण की 89 सीटों के लिए उम्मीदवारों की सूची का ऐलान करेगी। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की पहली बैठक में 89 सीटों के लिए सिर्फ 3 मुस्लिम उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा हुई। सूत्र बताते हैं कि पहले चरण के लिए सबसे अधिक पाटीदार समुदाय (पटेल) को 21 सीट देने का प्रस्ताव है। पिछले चुनाव में इतनी सीटों में से कांग्रेस ने सिर्फ 14 पर पटेल उम्मीदवार उतारे थे। इसके अलावा कांग्रेस 89 सीटों में से 16 आदिवासी उम्मीदवार, 5 एससी उम्मीदवार, 9 कोली समुदाय उम्मीदवार और 12 ओबीसी-ठाकोर उम्मीदवार उतारने का मन बना रही है। कांग्रेस 5 सीटों पर क्षत्रिय उम्मीदवारों पर दांव आजमा सकती है। पहली लिस्ट में 8 महिला उम्मीदवारों, यूथ कांग्रेस और NSUI से युवा उम्मीदवारों को कांग्रेस का टिकट मिल सकता है। सूत्रों के मुताबिक 89 में से 49 उम्मीदवार 35 से 50 साल तक की आयु के होंगे।