नई दिल्ली : गुजरात विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के नेता तथा पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला ने अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को आड़े हाथों लिया और खूब भडास निकाली। शंकर सिंह पिछले कुछ दिनों से नाराज चल रहे। उन्होंने कहा की इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए जिस तरह तयारी की जा रही है उससे हम कभी नहीं जीत सकते। गांधी नगर में अपने समर्थकों की सभा को संबोधित करते हुए वाघेला ने अपनी बात को पूरी ताकत और स्पष्टता से कहा। इस सम्मेलन में उनके विधायक पुत्र महेन्द्र सिंह वाघेला भी उपस्थित थे।

वाघेला ने कहा कि वह लंबे समय से कह रहे हैं कि चुनाव के लिए प्रत्याशियों का चयन चुनाव से काफी पहले होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हाथ पांव बांध कर पानी में फेंक देने पर किसी से तैरने की उम्मीद नहीं की जा सकती। वाघेला ने कहा कि उन्होंने कभी भी पार्टी विरोधी काम नहीं किया। हालांकि गोधरा में चुनाव लड़ने के दौरान भीतरघात के कारण उन्हें हार भी झेलनी पडी। वाघेला ने कहा कि इस बार हम पाटीदार ओबीसी और अन्य जातियों की नाराजगी के चलते अच्छे से तैयारी कर पार्टी को सत्ता में वापसी ला सकते है पर चुनावी परीक्षा के लिए होमवर्क ठीक से नहीं हो रहा है।

उन्होंने 2012 में हुए चुनाव में अंतिम समय में प्रत्याशी घोषित करने से पार्टी को हुए नुकसान की भी चर्चा की तथा कथित तौर पर बिना सभी 57 विधायकों से पूछे उन्हें प्रत्याशी बनाने के बारे में घोषणा करने के प्रदेश नेतृत्व के फैसले पर भी सवाल खडे किए। उन्होंने फिर कहा कि वह मुख्यमंत्री पद के दावेदार नहीं और इस पर चर्चा से पहले चुनाव जीत कर सरकार बनाने की स्थिति में पहुंचना जरूरी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी से कहा है कि पार्टी के ही कुछ लोग उन्हें बाहर करना चाहते हैं, पूरे शहर में ‘बापू फॉर सीएम’ के पोस्टर लगा रहे हैं। बहुत हो गया, मैंने अपनी निराशा को बताने के लिए आपको फोन किया था।’

यूपी में पार्टी की हार का जिक्र करते हुए वाघेला ने शीर्ष नेतृत्व पर जमकर हमला किया और कहा कि नेतृत्व अपनी गलतियों से सीखना ही नहीं चाहता। वाघेला ने शनिवार को पार्टी की एक आधिकारिक बैठक में भाग नहीं लेकर अपने समर्थकों की पूर्व घोषित बैठक में शिरकत की। परन्तु बार बार के इंकार के बावजूद उनके तथा गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी के बीच खटास की अटकलें कम नहीं हो रही।हालांकि खुले में दोनों नेता इस बात से इंकार कर रहे हैं पर राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि वाघेला सोलंकी की अध्यक्ष पद से छुट्टी चाहते हैं। गांधीनगर में 3000 से ज्यादा समर्थकों की एक सभा को संबोधित करते हुए वाघेला ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की प्रति उनकी प्रतिबद्धता पूरी हो गई है।