जुनैद की हत्या के बाद गांव खंदावली में मातम, सियासत गरमाई


बल्लभगढ़: गांव खंदावली के 16 वर्षीय जुनैद की ट्रेन में चाकू से गोदकर की गई हत्या के बाद समूचे गांव में मातम छाया है। जुनैद के घर के सामने लोगों की भीड़ जरुर है लेकिन बाकि गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा है। नमाज पढऩे के लिए मस्जिद तक पहुंचने वाले लोग इसके बाद फिर से घर में केद हो जाते है, जबकि ईद के इस माहौल में बाकी मुस्लिम आबादी वाले इलाकों में अमन है, लेकिन यहां जैसे जुनैद के साथ सभी की खुशियां चली गई। हर कोई इस दर्दनाक हादसे की कड़े शब्दों में निंदा कर रहा है। खंदावली के जलालुद्दीन के 5वें नंबर के बेटे जुनैद की हत्या व घायल शाकिर के मामले में पूरा गांव सदमे में है। गांव के लोगों का मन काम पर जाने को नहीं कर रहा है।

गांव के अधिकतर लोग जलालुद्दीन के साथ इस दुख की घड़ी में खड़े है। गांव के रफीक खां बताते है कि वह अपनी स्वयं की गाड़ी चलाते हैं किंतु इस हादसे ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया है। अब केवल यही लग रहा है कि किसी तरह से आरोपी सलाखों के पीछे पहुंचे और घायल शाकिर अपने घर वापस आ जाए। गांव के जावेद मास्टर कहते है कि अब कामकाज में मन नहीं लग रहा है। केवल और केवल चहेते जुनैद के हत्यारों को सजा मिले। इसी प्रकार गांव के अब्दुल रज्जा भी अपने भरे दिल से यही कहते है कि जलालुद्दीन के परिवार को समय रहते इंसाफ मिले। इसके बाद ही कामकाज में मन लगेगा।

कुरान शरीफ को कंठस्थ कर हाफिज की उपाधि ली: सात भाईयों में पांचवें नंबर के 16 वर्षीय जुनैद प्रतिभा के धनी थे। 13 वर्ष की उम्र में ही उसने कुरान शरीफ को कंठस्थ करके हाफिज की उपाधि हासिल कर ली थी। इसके बाद निरंतर तालीम और तकरीर करके वो खुद को मौलवियत की तालीम के लिए तैयार कर रहे थे। तराबीह पूरी होने के बाद नमाजियों से बतौर ईनाम के रुप में मिले 5 हजार रुपए की खुशी में जुनैद रात भर ठीक से नहीं सो पाया था। अपने बड़े भाई हाशिम और गांव के दो अन्य दोस्तों के साथ वह गुरुवार सुबह फज्र की नमाज के बाद ईद की खरीददारी करने के लिए दिल्ली के लिए रवाना हो गया था।

शासन-प्रशासन से बेहद खफा जुनैद का परिवार
ट्रेन में मारे गए हाफिज जुनैद के परिवार सहित गांव खंदावली के लोग शासन-प्रशासन से बेहद खफा हैं। हत्या के तीन दिन बाद भी उनका दुख बांटने के लिए सरकार का कोई मंत्री और नौकरशाह मिलने नहीं पहुंचा है, जिसकी वजह से सरकार के प्रति गांव में नाराजगी है। गुस्सा इस हद तक है कि युवा वर्ग तो यह कहने लगा है कि अगर अन्य घटना की तरह वो भी हादसे के बाद नेशनल हाईवे को जाम कर देते या फिर शव को दफनाने से पहले कोई विरोध प्रदर्शन करते तो फिर सभी मंत्री और अधिकारी मौके पर पहुंच जाते, लेकिन ग्रामीणों ने इतने दर्दनाक हादसे के बाद भी सब्र से काम लिया।

जुनैद के पिता जलालुद्दीन का कहना है कि हमें किसी प्रकार की मांग नहीं करनी है, हमारी तो सिर्फ हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करके उन्हें कडी से कडी सजा दिलाने की मांग है। दूर दराज से लोग दुख बांटने के लिए आ रहे है, लेकिन सरकार और प्रशासन की तरफ से आंसू पोछने वाला कोई नहीं आया है। जुनैद के भाई हाशिम का कहना है कि रेलवे पुलिस की तरफ से कार्रवाही हो रही है, बाकि शासन प्रशासन ने अभी तक कोई सुध नहीं ली है।

लिंगानुपाल में अव्वल है गांव खंदावली: गांव खंदावली पिछले काफी सालों से पूरे क्षेत्र में लिंग अनुपात में अव्वल स्थान हासिल कर रहा है। यहां 1000 लड़कों पर 1200 लड़कियां हैं। लिंग अनुपात बेहतर होने के चलते सरकार की तरफ से पंचायत को दो बार ईनाम देकर भी सम्मानित किया गया है। इतना ही नहीं गांव के 70 प्रतिशत लोग मौजूदा समय में शिक्षित हैं, गांव का युवा तो पढ़ाई की ओर विशेष ध्यान दे रहा है। गांव की आबादी करीब 5000 है, जिनमें 90 फीसदी जनसंख्या अल्पसंख्यकों की है। गांव में पिछले करीब 5 साल से लड़कों के मुकाबले लड़कियां की संख्या अधिक रही है। यही कारण है कि गांव को 2012 में तत्कालीन महिला सरपंच नूर निशा को व मौजूदा सरपंच निशार अहमद को प्रशासनिक स्तर पर सम्मानित किया गया।

– सुरेश बंसल