सरकार पर लगाया वायदा खिलाफी का आरोप


फरीदाबाद : सरकार की वादाखिलाफी और कर्मचारियों की मांगों के प्रति उदासीनपूर्ण रवैये से नाराज विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने आज विरोध गेट मीटिंगों का आयोजन किया। गेट मीटिंगों में सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किए गए। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशव्यापी आन्दोलन के तहत आज बिजली, टूरिज्म, नगर निगम, रोडवेज, पशुपालन, हुडा, वन, जनस्वास्थ्य, सिंचाई, लोक निर्माण आदि अनेक विभागों में गेट मीटिंगों का आयोजन किया गया।

आन्दोलन की अगली कड़ी में 22 व 23 जुलाई, 2०17 को सीएम सिटी करनाल में कर्मचारी 24 घंटे का सामूहिक पड़ाव डालेंगे। इन गेट मीटिंगों का नगर निगम में नरेश कुमार शास्त्री, सुनील चिंडालिया व बलबीर बालगुहेर, बिजली विभाग में सुभाष लाम्बा, शब्बीर अहमद, अशोक कुमार, रोडवेज में राम आसरे यादव, हाजी शहजाद, जितेन्द्र धनखड़, रविन्द्र नागर, पशुपालन में राजबेल देशवाल, टूरिज्म में युद्धवीर सिंह खत्री, टीकाराम शर्मा, सुभाष देशवाल, दिगम्बर डागर, विरेन्द्र शर्मा, वन विभाग में बुधराम, योगेन्द्र सिंह, हुडा में खुर्शीद अहमद व धर्मबीर वैष्णव आदि नेता नेतृत्व कर रहे थे।

सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लाम्बा, वरिष्ठ उपप्रधान नरेश कुमार शास्त्री व मुख्य संगठनकर्ता विरेन्द्र सिंह डंगवाल ने विभिन्न विभागों में आयोजित विरोध गेट मीटिंगों को सम्बोधित करते हुए सरकार पर चुनाव घोषणा पत्र में किए वायदों से मुकरने, कर्मचारियों की नीतिगत मांगों की अनदेखी करने और रोडवेज, बिजली, स्वास्थ्य आदि जनसेवा के तमाम विभागों में आऊटसोर्सिंग व निजीकरण की नीतियों को लागू करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि सरकार पार्ट टाईम व डीसी रेट अनुबंध आधार पर लगे कर्मचारियों की न तो सेवाएं नियमित करना चाहती और न ही सर्वोच्च न्यायालय के समान काम के लिए समान वेतनमान देने के निर्णय को लागू कर रही है। सरकार ने अपनी ही आऊटसोर्सिंग नीति के विरुद्ध ठेकेदारों के मार्फत कर्मचारियों को नियुक्त किया हुआ है, जहां उनका भारी मानसिक व आर्थिक शोषण हो रहा है।

उन्होंने कहा कि विभिन्न बोर्डों व निगमों के 3० हजार से ज्यादा कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ नहीं दिया गया है। सरकार कैशलेस मेडिकल सुविधा देने, जोखिमपूर्ण कार्य करने वाले कर्मचारियों को 5 हजार रुपए जोखिम भत्ता देने, विभिन्न विभागों में खाली पड़े लाखों पदों को पक्की भर्ती से भरते हुए बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने आदि के प्रति कतई गंभीर नहीं है।

– राकेश देव