लोकल ट्रेन में सीट को लेकर दो गुटों में चले लात-घूंसे


फरीदाबाद: सीट पर बैठने को लेकर मथुरा से नई दिल्ली की तरफ जानें वाली लोकल ट्रेन में शुक्रवार दो गुटों में जमकर लात घूंसे चले। यह मामला करीब 6 बजे हुआ। जिसमें एक 42 वर्षीय महिला की पेट में चोट लगनें की वजह से घायल हो गईं, जिसे ईलाज करानें के लिए बादशाह खान अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां से उसे डॉक्टरों ने दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल के लिए रैफर कर दिया। पुलिस की मानें तो वह महिला फरीदाबाद में अपने किसी रिश्तेदार के घर चली गईं। राजकीय रेलवे पुलिस के डीएसपी महेंद्र वर्मा का कहना हैं कि पीडि़त महिला संतोष दुबे का बादशाह खान अस्पताल में मेडिकल करवा कर व उनका केस बना कर छाता राजकीय रेलवे पुलिस को भेज दिया ताकि वह आगे की कार्रवाई कर सकें।

मिली जानकारी के अनुसार नई दिल्ली के नांगलोई निवासी संतोष दुबे, पियूस, मोहन, पत्रिका दुबे सहित कुल नौ लोग थे जिसमें तीन बच्चें शामिल हैं। यह सभी लोग एक ही परिवार के बताएं गए हैं। बताया गया हैं कि यह सभी लोग गोवर्धन से परिक्रमा करके मथुरा से नई दिल्ली की ओर जानें वाली लोकल ट्रैन से अपने घर लौटनें हेतु चढें थे। जैसे ही ट्रेन उत्तरप्रदेश के छाता स्टेशन पर पहुंची तो वहां से एक कम्पनी के स्टीकर लगे टी शर्ट पहने हुए 8 से 9 लोग उन लोगों को धक्कें मारते हुए ट्रेन में चढ़े थे के बाद यहां पर धक्का मुक्की करनें की वजह से दोनों गुटों में हल्का फुल्का झगड़ा हुआ। बताया गया है कि छाता से जो लोग

ट्रेन में चढ़े थे ,लोगों की माने तो इसके थोड़ी देर के बाद फिर से इन दोनों गुटों का आपस में सीट पर बैठनें को लेकर झगड़ा शुरू हो गया जिसमें उन लोगों ने जम कर संतोष दुबे और उसके परिवार के अन्य लोगों की लात और घुसों से धुनाई कर दी। इस दौरान उनके साथ मौजूद छोटें .छोटे बच्चें थे जोकि झगड़े के कारण चीखतें.चिल्ल्तें रहे। मालूम हैं कि चोट लगने की वजह से संतोष दुबे की ट्रेन में तबियत खऱाब हो गईं और उन्हें ओल्ड फरीदाबाद रेलवे स्टेशन पर उतार लिया गया और संतोष दुबे को उपचार हेतु बी के अस्पताल में दाखिल कराया गया हैं जहां से उसे डॉक्टरों ने दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल में रेफर कर दिया हैं। बताया गया हैं कि हमलावारों में एक हमलावर को ओल्ड फरीदाबाद रेलवे स्टेशन पर जिसके टी शर्ट पर एक कम्पनी का नाम लिखा हुआ था जिसकों कुछ लोगों ने पकड़ लिया था बाद में वह अपने आपको किसी तरह से छुड़ा कर वहां से भाग गया।

(राकेश देव)