साइबर सिटी में न बिजली न पानी


गुरुग्राम: साइबर सिटी में इन दिनों बिजली रहती है तो पानी नहीं, पानी आता है तो बिजली नहीं। कई बार दोनों साथ-साथ गायब। यही नहीं अब साइबर सिटी के ऊपर जीरो कट की मार पडऩे लगी है यानी एक साथ आधे शहर की बिजली गुल हो जाती है। 41.0 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुके पारे की गर्मी में पेयजल संकट ने लाखों लोगों के हलक सूखा दिए हैं। पूरा पुराना शहर पेयजल की किल्लत को झेल रहा है। हुडा व नगर निगम के अधिकारियों में तालमेल के अभाव के चलते भी लोगों को और भी ज्यादा दिक्कत हो रही है। दोनो ही विभाग उक्त समस्या के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड लेते है। बिजली के आने-जाने का कोई समय नहीं है। बिजली संकट के कारण पेयजल सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। गृहणियों के अलावा ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों के साथ-साथ दुकानदारों व फैक्ट्री संचालकों को बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है। दुकानदारों की जहां दुकानदारी प्रभावित हो रही हैए वहीं बिजली संकट के कारण फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

हालात बद से बदतर: पिछले करीब पंद्रह दिन से सेक्टर 21, 22 और सेक्टर 23 में लोग पेयजल को तरस गए हैं। इन तीनों सेक्टरों की आबादी करीब सवा लाख है। हालात यह है कि इन सेक्टरों में पानी को स्टोर करने के लिए बनाए गए पांच टैंक फुल नहीं हो पा रहे हैं। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि हुडा के प्लांट से पानी की पूरी सप्लाई नहीं मिल रही है। हालात ये है कि पानी के टैंकर मंगवाने के लिए लोगों की जेब ढ़ीली होने लगी है।

बैठकों का दौर मगर रिजल्ट शून्य: सेक्टर 21,22 और 23 में गहराया पेयजल संकट से निपटने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों की कई बार बैठकें भी हो चुकी है मगर रिजल्ट शून्य ही है। हालांकि की हुडा विभाग के अधिकारियों का दावा है कि शहर को पूरा पानी दिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर लोगों का कहना है कि तपती गर्मी के एक एक बूंद को तरसने को मजबूर है स्थानीय जनता। अधिकारी आते तो है बैठकें भी करते है मगर पेयजल की पूर्ति के लिए कोई ठोक कदम नहीं उठाते।

बिजली के बिना जीना मुश्किल: सेक्टर 22 निवासी राजीव सिंह कहते हैं कि बिजली के बिना मुश्किल हो गया है। कई बार ऐसा लगता है कि क्यों साइबर सिटी में आशियाना बनाया। बाहर के लोगों को लगता है कि वे लोग कितने सुख से रहे हैं। पालम विहार निवासी लालजी राम कहते हैं कि दस दिन हो गए न बच्चे सही से रात में सो पाए हैं और न ही वह। रात दस बजे के बाद कई बार बिजली गुल होती है। दिन में बिजली नहीं रहने पर अधिक फर्क नहीं पड़ता लेकिन रात में अधिक परेशानी होती है।

– सतबीर भारद्वाज