गोला-बारूद क्यों नहीं खरीदा ?


कैथल: देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर रणदीप सुरजेवाला ने मोदी सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि अभी हाल ही में कैग की रिपोर्ट अनुसार हमारी सेना के पास केवल 10 दिन से ज्यादा गोला-बारूद मौजूद नहीं है जो मोदी सरकार की विफलता के साथ-साथ चिंताजनक भी है । हम मोदी सरकार से पूछना चाहते हैं कि साल 2013 में कांग्रेस सरकार के बनाए अमुनीशन रोडमैप पर कार्यवाही क्यों नही की गई ? मोदी सरकार ने 3 साल में सेना के लिए गोला बारूद क्यों नही खरीदा ? हमारी सेना के लिए गोला बारूद और संसाधन मौजूद क्यों नही है ? अगर हमारी सेना के पास गोला बारूद और उचित संसाधन नही होंगे तो देश की सुरक्षा कैसे होगी।

‘भाजपा ने किया किसानों के साथ विश्वासघात।’ उक्त शब्द आज किसान भवन अपने निवास पर जनता की समस्याएं सुनते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस मीडिया प्रभारी व मौजूदा विधायक रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहे। सुरजेवाला ने कहा कि केंद्र और हरियाणा की भाजपा सरकारों ने किसान की फसल की ‘लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफा’ देने का वायदा कर सत्ता हथियाई और सिंहासन पर बैठते ही सबसे पहले किसान-मजदूर के हकों पर कुठाराघात किया। सुरजेवाला ने कहा कि खाद की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हुई कमी तक का लाभ भी किसानों को नहीं मिला। साल 2014 के मुकाबले डीएपी, पोटाश और यूरिया की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की कमी आ चुकी है और इस लिहाज से यूरिया, डीएपी और पोटाश की कीमतों का बाजार भाव आधा हो जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की शह पर कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं और किसान लुट रहा है। यही नहीं, पहली बार खाद पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया गया।

खेती पर टैक्सों का बोझ डालते हुए कीटनाशक दवाईयों पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया गया, ट्रैक्टर व खेती के सभी उपकरणों पर 12 प्रतिशत तथा ट्रैक्टर के टायरों व इंजन पर 28 प्रतिशत कर लगा दिया गया है। एक तरफ किसान की सब्जी और फलों को कोल्ड स्टोरेज में रखने की बात मुख्यमंत्री खट्टर करते हैं, तो दूसरी तरफ कोल्ड स्टोरेज पर 18 प्रतिशत टैक्स लगा देते हैं। भाजपा ने गेहूं आयात पर आयात शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर 0 प्रतिशत कर दिया और अनाज के दलालों से 70 लाख टन गेहूं का आयात 2016-17 में उस समय किया जब किसान की फसल बाजार में आने वाली थी। इसीलिए रिकॉर्ड कृषि उत्पादन के बावजूद देश के खाद्यान्न आयात में पिछले 3 साल में 66 गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि 2014-15 में 134 करोड़ रु. की लागत से गेंहू, जौ और चावल का आयात हुआ था, जो 2016-17 में बढ़कर 9009 करोड़ रु. हो गया है।

(मनोज वर्मा)