शिमला नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने दर्ज की ऐतिहासिक जीत


भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बीते तीन दशक में पहली बार शिमला नगर निगम में सर्वाधिक सीटें जीतकर इतिहास रच दिया, लेकिन वह 18 सदस्यों के सामान्य बहुमत के आंकड़े को हासिल करने में नाकाम रही। पार्टी ने 17 सीटों पर जीत दर्ज की। बीजेपी ने 34 में से 17 सीटों पर जीत हासिल की। इस बड़ी जीत पर पीएम मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इसे विकास की जीत बताया।

पीएम मोदी ने ट्वीट किया, ”शिमला नगर निगम चुनाव में बीजेपी की जीत ऐतिहासक है…यह जीत दिखाता है कि लोगों का विकास की राजनीति में विश्वास है।”

पीएम मोदी ने एक और ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, ”मैं शिमला के लोगों का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने बीजेपी का समर्थन किया..कार्यकर्ताओं और नेताओं को उनकी कड़ी मेहनत के लिए बधाई।”

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साथ ही चार निर्दलीय और मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का एक उम्मीदवार भी चुनाव जीतने में कामयाब रहा। तीन निर्दलीय पार्षदों शारदा चौहान, कुसुम लता तथा संजय परमार ने कांग्रेस को अपना समर्थन देने का ऐलान किया, जिसका अर्थ है कि कांग्रेस के पास 15 पार्षदों का समर्थन है, लेकिन भाजपा के 17 पार्षदों की तुलना में आंकड़े अभी भी उसके पक्ष में नहीं हैं।

मतदान शुक्रवार को हुआ था, जिसमें 91,000 से भी अधिक योग्य मतदाताओं में से करीब 58 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। चुनाव में निर्वासित तिब्बतियों ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया। चेन्नई और कोलकाता के बाद शिमला सबसे पुराना नगर निगम है।

इसके साथ ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी ट्वीट करते हुए शिमला के लोगों के लोगों को धन्यवाद कहा और कार्यकर्ताओं को बधाई दी।

चुनाव में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच था। हालांकि उम्मीदवारों ने पार्टी के चुनाव चिन्हों पर चुनाव नहीं लड़ा। बीजेपी ने 34 उम्मीदवारों, कांग्रेस ने 27 और मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने 22 उम्मीदवारों का समर्थन किया था। शिमला नगर निगम पर 26 वर्षों से कांग्रेस काबिज रही है। वर्ष 2012 में माकपा ने महापौर, उप महापौर और साथ ही एक पार्षद की सीट जीती थी। इस प्रकार माकपा ने केवल तीन सदस्यों की बदौलत 25 सदस्यीय सदन में शासन किया था, अधिकांश पार्षद कांग्रेस के थे।