हिंदी को आशा के अनुरूप समर्थन नहीं मिल रहा


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 भारतीयों के बीच एक आम भाषा के तौर पर हिंदी की लोकप्रियता बढ़ रही है। हालांकि नौकरशाही, राजनीति और आधिकारिक क्षेत्रों में भाषा को आशा के अनुरुप समर्थन नहीं मिल रहा है। भाषा को लोकप्रिय बनाने के लिए आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में वक्ताओं ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी को सार्वभौम और आम भाषा के रूप में देशभर में स्वीकार्यता मिली है।

तीन दिवसीय सम्मेलन गैर हिंदी प्रांतों और विदेशों में हिंदी भाषा और साहित्य: वर्तमान एवं भविष्य का समापन आज यहां हुआ। इसमें देश विदेश के करीब 500 लोगों ने हिस्सा लिया। देश से हिंदी के विद्वान और अकादमिक क्षेत्र के लोगों के अलावा बांग्लादेश, भूटान, चीन, फिजी, इंडोनेशिया, मलेशिया, मॉरिशस, नेपाल, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड और यूएसए के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। इसका आयोजन भारतीय विद्या मंदिर और भारतीय संस्कृति संसद ने संयुक्त रूप से किया।

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