नई दिल्ली: कर्नाटक के सियासी धमासान के बीच आज (शुक्रवार) सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा को दोहरा झटका ‌दिया। पहला  येदियुरप्पा सरकार को कल शाम 4 बजे शक्ति परीक्षण पेश करने को कहा है। ‌जिसके ‌लिए भाजपा अभी तैयार नहीं थी, साथ ही विधानसभा के लिए एक एंग्लो-इंडियन सदस्य को मनोनीत करने पर भी फिलहाल रोक लगा दी है।

बता दे ‌कि शीर्ष कोर्ट उस याचिका पर दोबारा सुनवाई कर रही थी, जिसमें कांग्रेस और जेडी-एस ने राज्यपाल वजुभाई वाला द्वारा येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता दिए जाने को चुनौती दी थी।

क्या है अभी दलगत स्थिति?

कर्नाटक विधानसभा में 222 सीटों के लिए चुनाव हुए हैं। यानी बहुमत के लिए 112 सीटों की जरूरत होगी.।बीजेपी के 104 विधायक जीतकर आए हैं। जेडीएस के 37 और कांग्रेस के 78 विधायक और 3 अन्य जीत कर आए हैं. यानी बहुमत साबित करने के लिए बीजेपी को अभी भी 8 विधायकों की जरूरत पड़ेगी। लेकिन जेडीएस के कुमारस्वामी दो सीटों से जीतकर विधायक बने हैं. ऐसे में उन्हें एक सीट से इस्तीफा देना पड़ेगा, तो फिर 221 सीट के लिहाज से बीजेपी को 111 सीटों की जरूरत पड़ेगी बहुमत साबित करने के लिए।

भाजपा-कांग्रेस दोनो कर रही हैं बहुमत का  दावा

बहुमत की जोड़तोड़ के बीच कांग्रेस और जेडीएस ने अपने विधायकों को बस में ले जाकर हैदराबाद के होटल में रखा है। कांग्रेस और जेडीएस का दावा है कि उनके पास 115 विधायक हैं। केवल एक विधायक आनंद सिंह साथ मौजूद नहीं है। हालांकि, उनके समर्थन पत्र का दावा भी कांग्रेस कर रही है।

दूसरी ओर बीजेपी दावा कर रही है कि उसके पास बहुमत है। पार्टी के इस दावे के पीछे कई अटकलें लगाई जा रही हैं। ऐसा तभी हो सकता है जब फ्लोर टेस्ट के दौरान कांग्रेस और जेडीएस के कई विधायक गैरहाजिर रह जाएं। ये संख्या भी कम से कम 14 होनी चाहिए। तभी बहुमत 207 सीटों के आधार पर आंका जाएगा यानी इतने सदस्यों की विधानसभा में उपस्थिति के आधार पर, लेकिन बीजेपी ये स्थिति कैसे बनाएगी इसपर सबकी नजर होगी।

कांग्रेस के लिंगायत विधायकों पर बीजेपी की नजर

बहुमत के लिए जरूरी मैजिक नंबर को हासिल करने के लिए बीजेपी की नजर जेडीएस और कांग्रेस के कुछ विधायकों पर है। जिन्हें फ्लोर टेस्ट के दौरान सदन से गैरहाजिर रखकर बीजेपी अपने लिए स्थिति अनुकूल बना सकती है। अटकलों के अनुसार लिंगायत समुदाय से आने वाले कांग्रेस के 7 विधायक गैरहाजिर रह सकते हैं। क्योंकि कर्नाटक में लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय के बीच अदावत की कहानी पुरानी है। कुमारस्वामी को कांग्रेस सीएम पद पर लाना चाहती है जो कि वोक्कलिगा समुदाय से हैं। येदियुरप्पा लिंगायत समुदाय से आते हैं और लगातार लिंगायत मठों के जरिए कांग्रेस के लिंगायत विधायकों को साधने की कोशिश कर रहे हैं।

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