नेता सतीश प्रधान कल अयोध्या मामले में आत्मसमर्पण कर सकते हैं


लखनऊ : अयोध्या में विवादित ढांचा ध्वस्त करने के मामले में शिवसेना नेता सतीश प्रधान कल केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण कर सकते हैं। सीबीआई की विशेष अदालत केे न्यायाधीश सुरेश कुमार यादव के समक्ष मामले से जुडे पांच आरोपियों श्रीरामजन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास, पूर्व सांसद डा. रामविलास दास वेदान्ती, धर्मदास, बैकुण्ठ लाल शर्मा और चम्पत राय ने गत शनिवार को आत्मसमर्पण किया था।

अदालत ने शाम को ही उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया था। श्री प्रधान के वकील ने अदालत में कल कहा कि उनका मुवक्किल मुम्बई में है, इसलिए पेश होने की खातिर दो दिन की मोहलत दी जाये। मामले से जुड़े वकीलों के मुताबिक रायबरेली की विशेष अदालत में जिन सात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चल रहा था, उन समेत सभी 28 लोगों के अदालत में पेश होने के बाद सीबीआई भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी के तहत आरोप पत्र दाखिल करेगी। रायबरेली की विशेष अदालत में आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा चल रहा था।

जिसमें अशोक सिंहल और आचार्य गिरिराज किशोर की मृत्यु हो चुकी है। हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने रायबरेली में चल रहे मुकदमे को भी लखनऊ के सीबीआई की विशेष अदालत में स्थानान्तरित करते हुए दो साल के अन्दर फैसला सुनाने का आदेश दिया था। रायबरेली की विशेष अदालत में भाजपा नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी, डा. मुरली मनोहर जोशी, केन्द्रीय मंत्री उमा भारती, भाजपा सांसद विनय कटियार, साध्वी ऋतम्भरा और विष्णुहरि डालमिया के खिलाफ सुनवाई चल रही थी।

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के खिलाफ भी रायबरेली में मुकदमा चल रहा था लेकिन न्यायालय ने उन्हें राज्यपाल होने के नाते फिलहाल मुकदमा नहीं चलाने की छूट देकर बड़ी राहत दी है। ढांचा ध्वस्त होने के बाद रामजन्म भूमि थाने के तत्कालीन अध्यक्ष प्रियम्बदा शुक्ला ने अपराध संख्या 197/12 और तत्कालीन रामजन्म भूमि चौकी प्रभारी ने 198/12 पर मुकदमे दर्ज कराये थे। 197/12 में श्री आडवाणी समेत भाजपा और विश्व हिन्दू परिषद के नौ लोगों को नामजद किया गया था, जबकि 198/12 अपराध संख्या में हजारों अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।

अपराध संख्या 198/12 के तहत दर्ज कराये गये मुकदमें की सुनवाई लखनऊ में सीबीआई की विशेष अदालत में चल रही है जिसमें 195 लोगों की गवाही हो चुकी है। अभी भी सैंकडो लोगों की गवाही बाकी है। आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 153, 153ए, 505, 147, 149 और 120बी के तहत मामल दर्ज हैंं।

–  (वार्ता)