LoC निवासियों ने अपने लिये मांगे व्यक्तिगत बंकर


जम्मू कश्मीर में पाकिस्तानी सेना की ओर से गोलीबारी के बाद सीमावर्ती इलाकों में अपना घर छोडऩे के लिये मजबूर हुये लोग स्कूलों में बनाए गए शिविरों में रहने को मजबूर हैं। इन लोगों ने अब सरकार से अपने घरों पर व्यक्तिगत बंकर बनाये जाने की मांग की है।

पाकिस्तान की तरफ से की जाने वाली भारी गोलाबारी की वजह से करीब चार महीने पहले राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर 23 बस्तियों में रहने वाले 5,000 से ज्यादा लोगों को मजबूरन अपने घरों को छोडऩा पड़ा। हाल में राजौरी के अलग-अलग सेक्टरों में पाकिस्तान की तरफ से की गयी गोलीबारी में चार नागरिकों की मौत हो गयी जबकि पांच अन्य घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने कल गृह मंत्री राजनाथ सिंह से प्रत्येक घर के लिए व्यक्तिगत बंकर बनाने की मांग की थी। सिंह कल नौशेरा में सरकार द्वारा स्थापित किये गये छह शिविरों में से एक का दौरा करने पहुंचे थे।

जनगढ़ निवासी प्रषोतम कुमार ने कहा, हमारी पहली और सबसे महत्वपूर्ण मांग यह है कि अगर हमें दोबारा नियंत्रण रेखा पर रहना है तो सरकार को सीमा पर बसे प्रत्येक घर में बंकर बनाना चाहिए। यह नियंत्रण रेखा पर रहने वाले लोगों की सबसे अहम मांग है। सीमा शरणार्थी समन्वय समिति के अध्यक्ष कुमार ने अपनी मांग से सिंह को अवगत कराया और कहा, हमें भोजन से ज्यादा बंकर की जरूरत है। यह हमारे और हमारे परिवार के लिए बुलेट प्रूफ जैकेट की तरह है।

सीमावर्ती गांव कल्सियान के सरपंच बहादुर चौधरी ने कहा, अगर सभी निवासियों को उनके घरों पर बंकर मिलते हैं तो कोई भी नियंत्रण रेखा पर बसे गांवों को नहीं छोड़ेगा चाहे पाकिस्तान कितनी भारी गोलीबारी क्यों ना करें। नौशेरा के विधायक रविंदर रैना ने भी उनकी मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भूमि का एक हिस्सा नियंत्रण रेखा पर रहने वाले लोगों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि वे सुरक्षित ठिकाना बना सकें।

पाक की तरफ से होने वाली गोलाबारी की वजह से नौशेरा सेक्टर के पांच स्कूलों में बने शिविरों में रहने को मजबूर सीमावर्ती निवासी चार महीने बाद भी अपने घर जाने में हिचक रहे हैं क्योंकि पाकिस्तान की तरफ से बार-बार गोलाबारी होती रहती है।

नौशेरा सेक्टर में जीरो लाइन पर सैर माकरी गांव की निवासी सर्वेश्वरी देवी ने कहा, ऐसे में हम कैसे वापस लौट सकते हैं जब पाकिस्तानी सेना हमारे घरों पर गोलीबारी कर रही है? हम दशकों से पाकिस्तान की आक्रामकता का सामना कर रहे हैं। पाकिस्तान की ओर से बिना उकसावे की गोलीबारी के लिए आसान निशाना बनने के बजाय हम अपने घरों से दूर रहने को तरजीह देते हैं।

गृह मंत्री ने प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद सिंह और जम्मू कश्मीर के उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह के साथ कल शिविर में रहने वाले पुरऊष, महिलाओं और बच्चों से बातचीत की। सिंह ने सीमा पर रहने वाले लोगों से कहा, कुछ और वक्त रुकिये, पाकिस्तान को गोलीबारी बंद करने के लिये मजबूर होना पड़ेगा। वे चाहे गोलीबारी आज बंद करें या कल, उन्हें गोलीबारी और संघर्ष विराम उल्लंघन रोकना पड़ेगा।

उन्होंने कहा, सीमा पर रहने वाले लोगों की समस्याओं को सुलझाने के लिए जो कुछ भी संभव होगा, मैं करऊंगा। आप अनावश्यक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, मैं जानता हूं कि चाहे भारत-पाक सीमा या दुनिया में कोई भी सीमा हो अगर स्थानीय लोग वहां नहीं रह रहे हैं और अगर सीमावर्ती क्षेत्र खाली है तो आप कभी नहीं जान पाएंगे कि कौन सा विदेशी वहां आता है और अपनी गतिविधियां तथा सीमावर्ती भूमि का अतिक्रमण करना शुरू कर देता है। इसके बारे में कुछ भी भरोसे के साथ नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक संपथि देश की सीमाओं पर रह रहे भारतीय नागरिक हैं। सिंह ने सीमा पर रहने वाले लोगों को बताया कि वह मौसम की खराब परिस्थितियों के कारण पहले उनसे नहीं मिल सकें और उन्होंने कहा कि उन्हें उनकी मांगों के बारे में बताया गया है और जो भी संभव होगा, वह करेंगे।

उन्होंने कहा, अगर प्रधानमंत्री से बात करने की जरूरत हुई तो मैं उनसे भी बात करुंगा। उन्होंने स्थानीय लोगों को आश्वस्त किया कि सीमावर्ती इलाकों में भी अर्ध सैनिक बलों में भर्तियां की जायेंगी। जिला विकास आयुक्त शाहिद इकबाल चौधरी ने बताया कि सरकार नागरिकों की सुरक्षा के लिए नियंत्रण रेखा पर करीब 7000 व्यक्तिगत और समुदायिक भूमिगत बंकर बनाने की योजना बना रही है। इस संबंध में परियोजना रिपोर्ट को मंजूरी और फंड के लिए केंद्र के पास भेजा जा चुका है।

उन्होंने बताया कि सरकार ने स्थानीय क्षेत्र विकास निधि के तहत सबसे अधिक प्रभावित नौशेरा जिले में 100 बंकरों का निर्माण शुरू कर दिया है और कार्य प्रगति पर है।