फर्जी प्याज उत्पादक किसानों ने उठाया फायदा


शिवपुरी: प्रदेश व्यापी प्याज की बम्पर पैैदावार और कम मूल्य मिलने से मचे किसानों के गदर और किसान आंदोलन ने जहां राजनैतिक दलों को अपनी रोटी सेंकने का मौका तो दिया ही साथ ही सरकार ने इसमें जो किसानों को राहत दी उसका नाजायज फायदा उन किसानों ने उठा लिया जिनका प्याज बोने और प्याज की फसल से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था। इसके चलते जहां वास्तविक प्याज उत्पादक किसान अपने बाल नौचता रहा, तो वहीं फर्जी प्याज उत्पादक किसानों ने सरकारी रेट पर अच्छी और खराब दोनों प्याज बेचकर भारी मुनाफा कमाया। जानकारी मिली है कि मामला उजागर होने से कर्ई किसानों के प्याज के भुगतान पर रोक लगा दी गई है।

बताते चलें कि इस बार सारे प्रदेश में प्याज की बम्पर पैदावार हुई जिसके चलते किसानों को कम रेट पर प्याज बेचना पड़ी और इसके बाद उग्र किसान आंदोलन ने मध्य प्रदेश सरकार की हालत खराब कर दी। बाद में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को राहत देने के लिए 8 किलो की दर से सरकारी केन्द्रों पर प्याज खरीदना शुरू किया ताकि किसानों को राहत मिल सके हालांकि इसने सरकार को भारी नुकसान हुआ है। मगर इसका चतुर और चालाक किसानों ने नाजायज फायदा उठाया और शिवपुरी भी उससे अछूता नहीं रहा।

शिवपुरी में प्याज बोनी का रकबा कम होने के बाद किसानों के यहां प्याज की बम्पर पैदाबार हुई, जो जांच का और हैरत में डालने वाला विषय था। प्रशासन के संज्ञान में जब ये मामला आया तो प्रशासन ने प्याज खरीदी का रेंडम सिलेक्शन कराकर कुछ किसानों की जांच कराई, तो बहुत चौंैकाने वाली चीजें सामने आईं। इसमें कर्ई किसानों ने गेहंू, सोयाबीन सहित अन्य जिंसें अपने खेतों में बोर्ई थीं।

मगर उन्हीं के द्वारा आठ रुपए किलो की दर से सरकारी खरीद केन्द्रों पर प्याज बेच डाली गई। सवाल यह है कि जब आपने प्याज का उत्पादन ही नहीं किया तो फिर प्याज बेची कैसे। ठीक इसी तरह कर्ई किसानों ने उनके प्याज के रकबे से कर्ई गुना ज्यादा प्याज बेची। इसके भी तथ्य सामने आयें हैं। जब आपने केवल पांच बीघा में प्याज बोई है तो 50 बीघा की प्याज का उत्पादन किस तरह से आपने सरकार को बेचा। रेंडम सिलेक्शन में पता चला है कि लगभग दो दर्जन से अधिक वे किसान हैं जिन्होंने उत्पादन से कर्ई गुना ज्यादा प्याज बेचकर सरकारी गुल्लक में चूना लगाया है।

वहीं एक दर्जन से अधिक वे किसान चिन्हित हुए हैं जिन्होंने प्याज बोई ही नहीं थी मगर प्याज उत्पादक बनकर प्याज बेच दी।  सूत्रों के अनुसार ये बहुत छोटा मामला उजागर हुआ है। यदि प्रत्येक तहसील स्तर पर इसकी जांच की जाए तो करोड़ों रुपए के घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है और इसमें सैकड़ों फर्जी किसान भी लपेटे में आ सकते हैं। कहा तो यह भी जाता है कि मंडी से जुड़े तमाम व्यापारियों ने भी किसानों के नाम पर दो रुपए किलो बिकने वाली प्याज को आठ रुपए किलो के हिसाब से सरकारी केन्द्रों बेच दिया है।

जिला खाद्य अधिकारी केपी प्रजापति ने कहा है कि प्रारंभिक जांच में यह चीज सामने आर्ई है और हमने इन किसानों के भुगतान पर फिलवक्त रोक लगा दी है। जानकारी तो यह भी है कि सारे प्रदेश में इसी प्रकार का खेल चला है और मध्य प्रदेश में सरकारी खरीदी केन्द्रों पर अच्छे रेट मिलने के कारण अन्य प्रांतों की प्याज भी मध्य प्रदेश के किसानों के नाम पर मध्य प्रदेश में लाकर इन खरीदी केन्द्रों पर बेची गई है।