प्याज खरीद में करोड़ों का घोटाला


भोपाल: मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय ङ्क्षसह ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि किसानों के नाम पर खरीदी गई प्याज में 500 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। साथ ही उन्होंने जेल प्रहरी परीक्षा में दूसरा व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाला होने का भी आरोप लगाया। श्री ङ्क्षसह ने जारी एक बयान में यह आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए अधिक प्याज उत्पादन का संकट सरकार के लिए घोटाले का अवसर बन गया। सरकार द्वारा आठ रुपए किलो पर प्याज खरीदने का लाभ कुछ ही किसानों को मिला है शेष पूरा लाभ सत्ता में बैठे लोगों, व्यापारियों और अफसरों के बीच हुए गठबंधन को मिला है।

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि किसानों की कम और व्यापारियों एवं दूसरे प्रांतों से सांठगांठ करके लाई गई प्याज की ज्यादा खरीदी हुई और बाद में उसे सडऩा बताकर करोड़ों रुपए का घोटाला किया गया। इसकी पुष्टि हाल में एक उच्च अधिकारी के खुलेआम प्याज खरीदी में सौदेबाजी करने से होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्याज खरीदी में शामिल घोटालेबाजों को मुख्यमंत्री का संरक्षण प्राप्त है।

अगर इसकी निष्पक्ष जांच हो तो एक बड़ा घोटाला सामने आएगा। व्यापमं घोटाले का उल्लेख करते हुए श्री ङ्क्षसह ने कहा कि उसकी जांच चल ही रही है कि जेल प्रहरी की परीक्षा में भी इस तरह का घोटाला सामने आना प्रदेश सरकार के लिए शर्मनाक है। उन्होंने मांग की कि इस मामले की जांच भी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सीबीआई से कहा कि व्यापमं महाघोटाले की जांच जल्द पूर्ण करें, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिले।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मंदसौर जिले की पिपल्या मंडी में हुए गोलीकांड के बाद किसान आंदोलन को बदनाम करने की जो साजिश सरकार के इशारे पर रची गई इससे एक फर्जी एफआईआर कांड भी उजागर हुआ है।  उन्होंने दावा किया कि सरकार ने गोलीकांड के बाद जिन लोगों के ऊपर एफआईआर दर्ज की, उनमें खेड़ा खदान गांव का बद्रीलाल भी शामिल है।

वह वर्ष 2011 में एक दुर्घटना में अपने कमर से नीचे के अंग खो चुका है। उसे लाने ले जाने के लिए दो लोगों की जरूरत पड़ती है लेकिन सरकार ने उसके खिलाफ न केवल एफआईआर की, बल्कि पांच हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया है।

श्री ङ्क्षसह ने कहा कि इसी तरह पुष्कर और कमलेश नामक व्यक्ति पर भी एफआईआर दर्ज की गई है, जबकि दोनों व्यक्ति आपराधिक प्रवृत्ति के हैं और जेल में बंद हैं। उन्होंने मांग की है कि न्यायिक जांच आयोग फर्जी एफआईआर कांड की जांच करे और जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर उन पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।