नरोत्तम की अयोग्य याचिका का फैसला करेगी दिल्ली हाई कोर्ट


हाल ही में निर्वाचन आयोग द्वारा अयोग्य घोषित किए गए मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री नरोत्तम मिश्रा की याचिका आज सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दी गई है। दरअसल, नरोत्तम मिश्रा राष्ट्रपति चुनाव में वोट देने की अनुमति चाहते हैं। भाजपा के इस नेता ने 17 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति के चुनाव में वोट देने की अनुमति के लिए दायर याचिका पर शीघ्र सुनवाई करने से मप्र उच्च न्यायालय द्वारा इंकार करने के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की पीठ ने नरोत्तम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और कांग्रेस के नेता राजेंद्र भारती की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से कहा कि वे दिल्ली उच्च न्यायालय की कार्यवाही मुख्य न्यायाधीश के समक्ष आज ही पेश होकर इसके लिए पीठ गठित करने का अनुरोध करें। भारती इस याचिका का विरोध कर रहे हैं। शीर्षअदालत ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय को इस मामले की कल से ही सुनवाई करनी चाहिए और राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान होने से पहले इसे पूरा कर लेना चाहिए।

इससे पहले, दिन में शीर्ष अदालत मिश्रा के वकील द्वारा इस मामले का उल्लेख करने पर इसकी सुनवाई के लिए सहमत हो गया था। निर्वाचन आयोग ने मिश्रा को 2008 के विधान सभा चुनावों में मीडिया में लेखों और एडवरटोरियल से संबंधित चुनावी खर्च के बारे में गलत जानकारी देने का दोषी ठहराते हुए उन्हें 23 जून को तीन साल के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ राजेंद्र भारती की शिकायत पर उन्हें तीन साल के लिए चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित करते हुए आयोग ने पेड न्यूज के बारे में कुछ कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया था। भारती ने आठ साल पहले 2009 में आयोग के पास नरोत्तम के बारे में पहली शिकायत भेजी थी।