पाकिस्तान की जीत पर जश्र मनाने वालों को जमानत


खंडवा : भारत को हराकर पाकिस्तान के आईसीसी चैंम्पियन्स ट्राफी विजेता बनने पर आतिशबाजी कर जश्न मनाने वाले खंडवा जिले के मोहद गांव के जेल में बंद 15 आरोपियों को बुरहानपुर की एक अदालत ने सशर्त जमानत दे दी है। बचाव पक्ष की दलील सुनने के बाद बुरहानपुर जिला अदालत के प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार गुप्ता की अदालत ने कल देर शाम इन सभी 15 आरोपियों को सशर्त जमानत पर रिहा करने के आदेश दिये।

बचाव पक्ष के वकील उबैद शेख के मुताबिक अदालत ने इनमें से 13 आरोपियों को 50-50 हजार रुपए के मुचलके, गांव में किसी भी जलसे जुलूस में शामिल नहीं होने और हर रविवार पुलिस थाना शाहपुर में नियमित रूप से हाजिर होने की मुख्य शर्तों पर जमानत प्रदान की है।

बुधवार रात को ही 15 आरोपियों में से 13 को जमानत की औपचारिकता पूर्ण करने पर रात 8 बजे खंडवा जिला जेल से रिहा कर दिया गया। वहीं, अन्य दो आरोपियों के बारे में थाना प्रभारी संजय पाठक ने बताया कि अदालत ने इन दोनों को नाबालिग माना है, जिसके प्रमाण स्कूली दस्तावेज से अदालत के समक्ष उनके वकील ने पेश किये थे और वे दोनों पहले ही अदालत के आदेश पर दो दिन पहले जेल से बाहर हो चुके हैं।

पाठक ने कहा कि इस तरह अदालत के आदेश के अनुसार अब सभी आरोपी जेल से बाहर हो गये हैं। उल्लेखनीय है कि बुरहानपुर जिले में शाहपुर थाना क्षेत्र के कस्बाई ग्राम मोहद में गत 18 जून को चैम्पियन्स क्रिकेट ट्रॉफी मैच के अंतिम मुकाबले में भारत पर पाकिस्तान की विजय को लेकर पटाखे चलाकर खुशियां मनाने और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने से ग्राम में उत्पन्न तनाव को लेकर पुलिस ने कार्रवाई करते हुये 19 जून को 15 लोगों को गिरफ्तार किया था और इनके विरुद्ध भादंवि की धारा 124 (ए) तथा 120 (बी) के तहत देशद्रोह का मामला दर्ज किया था।

इसके बाद 20 जून को इन्हें बुरहानपुर की एक अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 15 दिन के न्यायिक रिमांड पर बुरहानपुर जिले से सटी खंडवा जिला जेल भेजा गया। हालांकि, इसके दो दिन बाद ही 22 जून को इन 15 लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 124ए (देशद्रोह) का आरोप हटा दिया गया था और इसके स्थान पर भादंवि की धारा 153ए (सांप्रदायिक सौहार्द बिगाडऩा) लगाई गई, क्योंकि पुलिस जांच में पता चला था कि उनका इरादा देशद्रोह नहीं था और उनका पहले आपराधिक रिकार्ड भी नहीं था।