सातवें वेतनमान के नहीं बने नियम


भोपाल: प्रदेश सरकार ने भले ही अपने साढ़े चार लाख से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों को जुलाई 2017 से सातवां वेतनमान देने का फैसला कर लिया हो, पर इसके नियम अब तक नहीं बने हैं। इससे बड़े विभागों में अगस्त में मिलने वाले जुलाई माह की वेतन वृद्धि खटाई में पड़ सकती है। बताया जा रहा है कि अभी नियम बनने में एक सप्ताह और लग सकता है। इसके आधार पर प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी से विकल्प भरवाकर सहमति पत्र लिए जाएंगे।

सूत्रों का कहना है कि पिछले सप्ताह कैबिनेट निर्णय की फाइल वित्त विभाग पहुंची है। इसमें विभिन्न श्रेणी का वेतनमान नए फॉर्मूले से तय होगा। हर अधिकारी-कर्मचारी के वेतन की गणना 31 दिसंबर 2016 के वेतन के आधार पर होगी। यह काम तेजी के साथ पूरा करने के लिए सॉफ्टवेयर भी बनवाया गया है। जिसमें कर्मचारी कोड, 31 दिसंबर 2016 का वेतन और पद दर्ज करने पर नया वेतन बन जाएगा। इसका प्रिंट निकालकर अधिकारी-कर्मचारी सहमति पत्र भरेगा और विभागाध्यक्ष को सौंपेगा। इसमें विकल्प का भी उल्लेख रहेगा कि कर्मचारी नया वेतनमान ले रहा है या फिर पुराने वेतनमान में ही रहना चाहता है।

वहीं वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वेतनमान के नियम बनने में एक सप्ताह का समय लग सकता है। इसमें नए वेतनमान के लिए तय किए फॉर्मूले के साथ श्रेणी के हिसाब से मिल रहे और मिलने वाले वेतनमान का ब्योरा रहेगा। विभागाध्यक्ष कार्यालयों को वेतन की गणना में कोई परेशानी न हो, इसके लिए हर श्रेणी के उदाहरण भी दिए जाएंगे। बताया जाता है कि 20 से 25 तारीख के बीच वेतन के बिल बनकर कोषालय में लग जाते हैं। ऐसी सूरत में जिन कार्यालयों में कम कर्मचारी हैं वहां तो जुलाई का वेतन सातवें वेतनमान के हिसाब से बन सकता है, लेकिन ज्यादा कर्मचारियों वाले कार्यालयों को दिक्कत आ सकती है।

प्रदेश के ज्यादातर कर्मचारी संगठनों को आशंका है कि अगस्त माह में सातवां वेतनमान शायद ही मिल पाए। मंत्रालयीन कर्मचारी संघ अध्यक्ष सुधीर नायक का कहना है कि पहली बार वेतनमान को लेकर रहस्यमय स्थिति बनी है। अभी तक इसके आदेश जारी नहीं हुए है। एक माह का विकल्प कर्मचारियों को देना होता है। 20 तारीख से बिल लगने लगते हैं। वहीं राज्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह का कहना है कि इसी माह इंक्रीमेंट लगना है। नए फॉर्मूले से वेतन निर्धारण होना है। सर्विस बुक में एंट्री होगी। इस काम में वक्त लगता है, इसलिए संभावना नहीं है कि जुलाई का वेतन सातवें वेतनमान के हिसाब से मिल पाए।