गड़बड़ी करने वाली कंपनी को फिर दे दिया काम


भोपाल: राजधानी भोपाल में जेएनएनआरयूएम के तहत 415 करोड़ की लागत से वाटर डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क प्रोजेक्ट में कंपनी की गड़बड़ी के कारण शहर को 24 घंटे सातों दिन पानी नहीं मिल पा रहा है। यही नहीं कंपनी ने कार्य के दौरान जो सड़कें खोदी उसे भी ठीक नहीं किया। इसके बावजूद नगर निगम के अधिकारियों ने एक बार फिर उसी कंपनी को ठेका दे दिया। हालांकि एमआईसी मेंबरों की आपत्ति के बाद निर्णय लिया गया कि पुराने काम को ठीक कराने के बाद ही कंपनी को ठेका दिया जाए।

उल्लेखनीय है कि अमृत योजना के के तहत 263.71 करोड़ की लागत से शहर के 15 वार्डों और पुराने शहर के 70 वार्डों में पानी सप्लाई की योजना का काम लक्ष्मी इंजीनियरिंग को सौंपा गया है। गत दिवस गुरुवार को यह प्रस्ताव एमआईसी की बैठक में आया तो सदस्यों ने कंपनी द्वारा किए गए पुराने कामों की खामियां गिना दीं। एमआईसी मेंबर मनोज चौबे ने कहा कि नरेला विधानसभा क्षेत्र में इसी कंपनी ने काम किया, लेकिन सड़कें दुरूस्त करना तो दूर मलबा तक नहीं हटाया, जिससे सड़कें खुदी पड़ी रही जो दुर्घटना का कारण बनी। इस बीच न तो पाईप लाइन में पानी आया और न ही सड़कों का रेस्टोरेशन हुआ।

अब सड़क सुधारने काम निगम को करवाना पड़ रहा है। आखिरकार दोबारा इसी कंपनी को काम सौंपने का क्या औचित्य है? वहीं निगम द्वारा मॉड्यूलर टॉयलेट की तरह एनयूएलएम के 21 ट्रेनिंग सेंटर खोल दिए गए, इसमें तीन चालू भी हो गए, लेकिन इसका प्रस्ताव एमआईसी में रखा ही नहीं गया। एमआईसी सदस्य केवल मिश्रा ने कहा कि ज्यादातर सेंटर कागजों में चल रहे हैं। सदस्यों की आपत्ति के बाद महापौर आलोक शर्मा ने इस मामले की जांच करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि छोटे तालाब में 39 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन आर्च ब्रिज अब स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड को ट्रांसफर होगा। इसे पेन सिटी के तहत शामिल किया जाएगा। निगम की वित्तीय हालत ठीक नहीं होने के कारण ऐसा किया गया है।