सीडीआर मामला : पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई संबंधी कोर्ट के आदेश पर SC की रोक


Supreme Court

अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी की पत्नी के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) अवैध रूप से रखने के आरोपी एक वकील के खिलाफ जांच में शामिल महाराष्ट्र के पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई के महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने स्थगनादेश दिया है।

भारत के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर की पीठ ने हालांकि , वकील रिजवान सिद्दीकी को नोटिस जारी कर उसने चार सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है। राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और वकील निशांत कटनेश्वर ने बंबई उच्च न्यायालय के 21 मार्च के आदेश पर स्थगन की मांग की थी।

अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि ठाणे पुलिस ने रिजवान सिद्दीकी की गिरफ्तारी में मनमर्जी की और “कानूनी प्रक्रिया” का पालन नहीं किया है। सिद्दीकी की ओर से वकील सी. ए. सुन्दरम न्यायालय में पेश हुए थे। अदालत ने ठाणे पुलिस को निर्देश दिया था कि वह वकील रिजवान सिद्दीकी को हिरासत से रिहा करे।

पुलिस ने अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी की पत्नी का कॉल डिटेल रिकॉर्ड गैरकानूनी तरीके से हासिल करने का कथित रूप से आदेश देने के मामले में 16 मार्च को गिरफ्तार किया था। अदालत ने ठाणे पुलिस के वरिष्ठतम पुलिस अधिकारियों और गृह मंत्रालय को निर्देश दिया था कि वह ठाणे पुलिस की कार्रवाई की जांच करे। यदि सही लगे तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू करे।

रिजवान सिद्दीकी की पत्नी तस्नीम ने अपने पति की गिरफ्तारी के तरीके को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। अपनी अर्जी में तस्नीम ने दावा किया था कि उसके पति रिजवान सिद्दीकी को 14 फरवरी को ठाणे पुलिस की अपराध शाखा से गवाही का समन मिला था। लेकिन 16 मार्च को क्राइम ब्रांच के अधिकारी मौके पर आए और उन्होंने बयान दर्ज करते वक्त ही उसे बिना नोटिस दिये गिरफ्तार कर लिया।

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