मुंबई कांग्रेस ने की पार्टी में भगवाकरण की शुरूआत


मुंबई: मुंबई कांग्रेस ने पार्टी में भगवाकरण की जो शुरुआत की है उससे अखिल भारतीय कांग्रेस में हड़कंप मच गया है। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम ने महाप्रभारी मोहन प्रकाश के निर्देश पर मुंबई कांग्रेस में संत-महंत प्रकोष्ठ की स्थापना की है। इस प्रकोष्ठ का अध्यक्ष संत ओमदास को बनाया गया है। अध्यक्ष बनते ही स्वामी ओमदास ने ऐलान कर दिया कि कांग्रेस अब अयोध्या में राम मंदिर बनवाने में अग्रणी भूमिका निभायेगी। स्वामी ओमदास जब कांग्रेस के मंच से राम मंदिर बनाने का ऐलान कर रहे थे, तब मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष संजय निरुपम उनके बगल में बैठे थे। मुंबई कांग्रेस के इस भगवाकरण से पूरी कांग्रेस में अपनी विचारधारा से भटकने की चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को कांग्रेस के अनेक नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं ने पत्र लिखकर पूछा है कि क्या पार्टी अपना धर्म निरपेक्ष चरित्र छोडऩे जा रही है?

उल्लेखनीय है कि कुछ महीनों पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के सभी नेताओं की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में सभी राज्यों के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष और प्रमुख अल्पसंख्यक नेता शामिल हुए थे। इस बैठक में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने साफ कह दिया था कि पार्टी सत्ता पाने के लिये अपनी विचारधारा से कोई समझौता नहीं करेगी। जब नरम हिंदुत्व का सवाल आया तो राहुल गांधी ने साफ कह दिया कि नरम और कठोर हिंदुत्व की बात नहीं है पार्टी अपना धर्मनिरपेक्ष चेहरा बनाये रखेगी। ऐसे में सवाल यह पूछा जा रहा है कि महाराष्ट्र पार्टी प्रभारी मोहन प्रकाश और मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम ने किसके कहने पर कांग्रेस का भगवाकरण शुरू किया है?

महाराष्ट्र कांग्रेस के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता नसीम खान ने कहा है कि पार्टी में संत-महंत प्रकोष्ठ की स्थापना करना पार्टी संविधान के विपरीत है। कोई भी नेता व्यक्तिगत स्तर पर साधु-संतों, मुल्ला-मौलवियों, वाहे गुरुओं और पादरियों की समस्याएं सुन सकता है, उन्हें सुलझा सकता है और ये धर्म गुरु समाज के पथ प्रदर्शक हैं। इसलिये इनका राजनीतिकरण करना गलत है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शिराज मेहंदी ने कहा है कि कांग्रेस का भगवाकरण कदापि बर्दाश्त नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी उत्तर प्रदेश में 27 सालों से सत्ता से बाहर है लेकिन सत्ता पाने के लिये उसने किसी धर्म का सहारा नहीं लिया है।

बल्कि धर्मनिरपेक्ष विचार स्थापित करके यह जता दिया है कि कांग्रेस के लिये विचारधारा ही सर्वोपरि है। मंदिर-मस्जिद की राजनीति जिनको शोभा देती हो वह करें, लेकिन कांग्रेस सबकी पार्टी है इसमें भगवाकरण की कोई गुंजाइश नहीं है। कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान किदवई ने कहा है कि पार्टी में ऐसा कोई संविधान नहीं है कि संत-महंत या मुल्ला-मौलवियों का कोई प्रकोष्ठ बनाया जाय। पार्टी के नेताओं को अपने धर्म गुरुओं से मिलने की पूरी छूट है लेकिन कोई भी प्रांतीय कांग्रेस धर्म गुरुओं की ईकाई स्थापित करती है तो उसे अखिल भारतीय कांग्रेस कोई मान्यता नहीं देगी।

(राम किशोर त्रिवेदी)