ध्वनि प्रदूषण नियमों पर आदेशों का कोई वास्तविक पालन नहीं हुआ : बॉम्बे हाई कोर्ट


बॉम्बे हाई कोर्ट ने आज यह टिप्पणी करते हुए कहा कि ध्वनि प्रदूषण नियमों को लागू करने से संबद्ध कई आदेशों का कोई वास्तविक पालन नहीं हुआ है और महाराष्ट्र सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे को अपने खिलाफ कार्रवाई के तौर पर लेना बंद करे। हाई कोर्ट ने पिछले कुछ सालों में अनेक आदेशों में सरकार को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे कि ध्वनि प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जाए।

इनमें त्यौहारों या अन्य कार्यक्रमों के दौरान ध्वनि प्रदूषण के स्तर को रिकॉर्ड करने के उद्देश्य से प्रत्येक पुलिस थाना के लिए डेसीबल मीटर की खरीद का आदेश तथा इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल था। उच्च न्यायालय ने राजस्व विभाग को निर्देश दिया था कि वह गणेश उत्सव या अन्य कार्यक्रमों के लिए अवैध रूप से बनाए गए पंडालों की जांच करे और इनकी रिपोर्ट निकाय अधिकारियों को दे। इसमें विशेष तौर पर हेल्पलाइन एवं वेबसाइट स्थापित करने का भी निर्देश दिया गया था जहां ध्वनि प्रदूषण संबंधी शिकायतें की जा सकें।

न्यायमूर्ति ए. एस. ओका की अगुवाई वाली खंडपीठ ने कहा, “हमने पाया कि हमारे आदेशों में विभिन्न निर्देशों का पालन नहीं हुआ। सच्चे अर्थ में इनका कोई पालन नहीं किया गया। सबकुछ केवल कागज पर है। हम लोग यह नहीं समझ पाते कि आखिर राज्य सरकार इस मामले को अपने खिलाफ कार्रवाई के तौर पर क्यों ले रही है। आप हमारे आदेशों का निरादर कर सकते हैं लेकिन फिर भी आपको इनका पालन करना होगा।”

राज्य भर में राजस्व अधिकारियों द्वारा पंडालों की जांच के संबंध में सरकारी वकील अभिनंदन वाज्ञानी द्वारा पेश दो चार्टो और संबंधित निकाय संस्थाओं को दाखिल रिपोर्टो पर गौर करते हुए अदालत ने आज ये टिप्पणियां कीं। न्यायमूर्ति ओका ने वाज्ञानी को इनकी फिर से पुष्टि करने के लिए कहा। उन्होंने कहा, “इन चार्टो में कुछ तो गंभीर रूप से गलत है।” अदालत ने राज्य शहरी विकास विभाग एवं नगर निगमों को अवैध पंडालों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। अदालत ध्वनि प्रदूषण से जुड़ी कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इस मामले में अब अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।