शिवसेना का दावा, मोदी ने सुप्रिया सुले को मंत्रिमडंल में शामिल होने का दिया था आफर


मुंबई : शिव सेना ने अपने मुख्यपत्र ‘सामना’ में दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताजा कैबिनेट फेरबदल के दौरान एनसीपी प्रमुख शरद पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सुले को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने का ऑफर दिया था।

‘सामना’ में शिवसेना के वरिष्ठ नेता व रणनीतिकार संजय राउत और शरद पवार के बीच मुलाकात पर लेख छपा है। जब संजय राउत शरद पवार से मिले तो सीधे उनसे पूछा कि क्या एनसीपी एनडीए सरकार में शामिल होने जा रही है? इस पर पवार ने मीडिया को इस सारे अफवाह के लिए जिम्मेदार ठहराया। यहां तक कि पवार ने राउत से पीएम मोदी के साथ हुई उनकी हालिया मुलाकात का भी जिक्र किया।

इस दौरान पीएम ने खुद पवार से कहा था कि वह कैबिनेट में सुप्रिया को शामिल करना चाहते हैं। राउत का दावा है कि पीएम और पवार के साथ उस मीटिंग में सुप्रिया भी मौजूद थीं। जब सुप्रिया को यह ऑफर दिया गया तो उसने इसे नकारते हुए जवाब दिया कि बीजेपी में शामिल होने वाली वह आखिरी शख्स होंगी।

शिव सेना ने दावा किया है कि उसी दिन वित्त मंत्री अरुण जेटली और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में पवार के साथ शिरकत की थी। इससे इन अफवाहों को बल मिला था कि एनसीपी भी एनडीए का हिस्सा बनने जा रही है।

राउत ने साफ किया कि भले ही पवार कुछ भी कहें लेकिन महाराष्ट्र में एनसीपी के कई नेता बीजेपी के संपर्क में हैं। हालांकि शरद पवार और सुप्रिया सुले का ‘सामना’ में छपे लेख पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

सूत्रों का कहना है कि शिव सेना के हालिया बयानों और फैसलों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह खुश नहीं हैं। शिव सेना बार-बार बीजेपी से समर्थन वापस लेने का धमकी देती है। ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि शिव सेना समर्थन वापस लेती है तो बीजेपी एनसीपी से हाथ मिला सकती है।

हालिया विधानसभा और म्युनिसिपल चुनावों में बीजेपी की शानदार कामयाबी ने उसका हौसला बढ़ा दिया है। शिव सेना धीरे-धीरे परंपरागत वोटरों से हाथ धो रही है। यही वजह है कि बार-बार आक्रामक बयानों के जरिए शिव सेना दबाव की राजनीति बना रही है।

‘सामना’ में छपे लेख में संजय राउत मोदी सरकार की आलोचना करने से नहीं चूके। उन्होंने कहा कि बीजेपी अब तो कांग्रेस के रंग में ढल रही है। यदि एनसीपी के 41 विधायक बीजेपी का साथ देते हैं तो उनकी पार्टी समर्थन वापस लेने से बिल्कुल नहीं हिचकेगी।