बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 2019 में होने जा रहे लोकसभा चुनाव के लिए शनिवार को उत्तर प्रदेश में गठबंधन का ऐलान किया । दोनों ही दल राज्य की 80 संसदीय सीटों में से 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। इस गठबंधन से दोनों ही दलों ने कांग्रेस को अलग रखा लेकिन कहा कि वे अमेठी और रायबरेली सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारेंगे।

इन सीटों का प्रतिनिधित्व क्रमश: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और संप्रग प्रमुख सोनिया गांधी करती हैं। गठबंधन ने दो अन्य सीटें छोटे दलों के लिए छोड़ी हैं। साथ ही उन्होंने गठबंधन को एक नई राजनीतिक क्रांति करार दिया।

गठबंधन में कांग्रेस को शामिल नहीं किये जाने के बारे में मायावती बोलीं कि उनके शासन के दौरान गरीबी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार में वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि1975 में कांग्रेस की घोषित इमेरजेंसी थी तो आज भाजपा राज में अघोषित इमरजेंसी है। कांग्रेस और बीजेपी की सोच और कार्यशैली एक जैसी नजर आती है। रक्षा सौदे की खरीद में इन दोनों सरकारों में जबरदस्त घोटाले हुए। कांग्रेस के साथ लड़ने में हमें कोई खास फायदा नहीं होता है।

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बसपा सुप्रीमो ने कहा कि यूपी में बीजेपी ने बेइमानी से सरकार बनाई है। ऐसे में हमारा गठबंधन बीजेपी को केंद्र में आने से रोक सकता है और हमारा गठबंधन राजनीतिक क्रांति का संदेश है। उन्होंने कहा कि बीजेपी की अहंकारी सरकार से यूपी की जनता परेशान है।

मायावती ने कहा कि भाजपा ने इस गठबंधन को तोड़ने के लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव का नाम जानबूझकर खनन मामले से जोड़ा। उन्होंने कहा, ”भाजपा को मालूम होना चाहिए कि उनकी इस घिनौनी हरकत से सपा-बसपा गठबंधन को और ज्यादा मजबूती मिलेगी ।”

गठबंधन कितना लंबा चलेगा, इस सवाल पर मायावती ने कहा कि गठबंधन स्थायी है। यह सिर्फ लोकसभा चुनाव तक नहीं है बल्कि उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में भी चलेगा और उसके बाद भी चलेगा ।

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मायावती ने कहा कि देश के बेहतरी के लिए हम एक साथ आए है। जनविरोधी पार्टी को रोकने के लिए हम एक साथ आए है, उपचुनाव में इसकी शुरुआत हो चुकी थी। कांग्रेस की पिछले चुनाव में ज़मानत जब्त हो गई थी।

मायावती ने बीजेपी को जातिवादी पार्टी बताया और कहा कि जनहित में गेस्ट हाउस कांड को किनारे रखते हुए गठबंधन किया। उन्होंने कहा कि देश को जून 1995 की घटना से ऊपर रखते हुए गठबंधन का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि पूरे देश मे सभी लोग परेशान है। नोटबंदी व जीएसटी का फैसला बिना सोचे समझे किया गया है।

मायावती ने कहा कि देश की सवा सौ करोड़ जनता भाजपा की तानाशाही कार्यप्रणाली से परेशान है। चुनावी वादों की नाकामी से सभी परेशान है। सर्वसमाज को आदर देते हुए हम चुनावी गठबंधन कर रहे है। 2019 के लिए यह नई राजनीतिक क्रांति होगी।

मायावती के बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने उत्तर प्रदेश को ‘जाति प्रदेश’ बना दिया है, और तो और भाजपा ने भगवानों को भी जाति में बांट दिया । सपा मुखिया ने यह आशंका भी जताई कि भाजपा दंगा फसाद करा सकती है।

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उन्होंने कहा कि सपा-बसपा का गठबंधन केवल चुनावी गठबंधन नहीं है बल्कि यह गठबंधन भाजपा के अत्याचार का अंत भी है। ”भाजपा के अहंकार का विनाश करने के लिए बसपा और सपा का मिलना बहुत जरूरी था ।” अखिलेश ने कहा, ”मायावती का सम्मान मेरा सम्मान है। अगर भाजपा का कोई नेता मायावती का अपमान करता है तो सपा कार्यकर्ता समझ लें कि वह मायावती का नहीं बल्कि मेरा अपमान है।”

बसपा सुप्रीमो मायावती को प्रधानमंत्री बनाने के सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने हमेशा प्रधानमंत्री दिया है, मैं चाहूंगा कि इस बार भी यूपी से प्रधानमंत्री मिले।

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बता दें कि सपा और बसपा की साझा कांफ्रेंस होटल ताज पहुंच हुई। वही, प्रेस कॉन्फ्रेंस स्थल के बाहर सपा-बसपा की ओर से पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टर्स में बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा के मुखिया अखिलेश के फोटो भी लगाई गई हैं। साथ ही लिखा गया है कि सपा-बसपा आई है, नई उम्मीद लाई है।

इसके अलावा प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले लखनऊ में पोस्टर लगाए गए। इन पोस्टर्स के जरिए भाजपा पर तंज कसा गया है। पोस्टर्स में मायावती और अखिलेश की फोटो लगाई गई और लिखा गया है कि हमारा काम बोलता है और भाजपा का झूठ।