मीरा कुमार ने राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन पत्र भरा


नई दिल्ली : 17 विपक्षी दलों की उम्मीदवार मीरा कुमार ने आज राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। मीरा का मुकाबला एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद से हैं। मीरा कुमार द्वारा सुबह करीब 11 बजे संसद भवन में अपना नामांकन दाखिल किया।

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नामांकन भरने से पहले मीरा सुबह 9.45 बजे ‘राजघाट’ जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और फिर सुबह 10.30 बजे अपने पिता बाबू जगजीवन राम की समाधि स्थल ‘समता स्थल’ पर जाकर उन्हें भी श्रद्धांजलि दी।

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मीरा के साथ कांग्रेस, आरजेडी, एसपी, बीएसपी, डीएमके, नेशनल कॉन्फ्रेंस, आरएलडी, जेडीएस, जेएमएम, टीएमसी, लेफ्ट, एनसीपी, केरल कांग्रेस, आईयूएमएल, एआईयूडीएफ पार्टी है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, एनसीपी प्रमुख शरद पवार और लेफ्ट के सीताराम येचुरी जैसे यूपीए के कई बड़े नेता मौजूद थे | नामांकन के दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी नहीं नज़र आए लेकिन उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘बांटने की नीति के खिलाफ मीरा कुमार देश और लोगों को बांधे रखने की विचारधार में विश्वास रखती हैं |मीरा कुमार को उम्मीदवार बनाने पर हमें गर्व है |’

सूत्रों के मुताबिक मीरा ने चार सेटों में अपना  नामांकन पत्र जमा किया है  जिन्हें कई विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा प्रस्तावित और स्वीकृत किया जाएगा। अन्य दलों डीएमके, सपा, बसपा, आरेजएस और जेएमएम के प्रतिनिधि भी वहां मौजूद थे । राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के लिए आखिरी दिन आज है। राष्ट्रपति चुनाव 17 जुलाई को होना निर्धारित है।

राष्ट्रपति चुनाव के नतीजा 20 जुलाई को एलान होगा और 25 जुलाई को नए राष्ट्रपति का शपथ होगा। विपक्ष की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मीरा कुमार अपना चुनाव प्रचार अभियान साबरमती आश्रम से शुरु करेंगी। मीरा ने कल एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि वह न्याय और समानता के मूल्यों में विश्वास रखती हैं। उन्होंने उन सभी दलों का आभार जताया, जिन्होंने उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने का समर्थन किया है।

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उन्होंने कहा कि विपक्ष की एकता उन समान विचारों पर आधारित है जो लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय, प्रेस की स्वतंत्रता, गरीबी उन्मूलन तथा जातिगत व्यवस्था को खत्म करने पर विश्वास रखते हैं। JDU द्वारा उनकी उम्मीदवारी का समर्थन नहीं किए जाने के सवाल पर मीरा ने कहा कि राजनीति में यह कोई नई बात नहीं है, ऐसा हमेशा से होता आया है। राष्ट्रपति पद के लिए इस बार दोनों ही उम्मीदवार दलित समुदाय से होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसे दलित के खिलाफ दलित की लड़ाई के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।