‘मीटू’ कैंपेन के तहत यौन शोषण के आरोपों के बीच विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने रविवार को सफाई देते हुए कहा है कि मुझ पर लगे सभी आरोप गलत और मनगढ़ंत हैं। मेरे खिलाफ लगाए गए दुर्व्यवहार के आरोप झूठे और निराधार हैं। ये आरोप द्वेष भावना से लगाए गए हैं। मैं आधिकारिक टूर पर देश से बाहर था इसलिए पहले जवाब नहीं दे पाया।
एमजे अकबर ने कहा कि अपने ऊपर लगे इन आरोपों पर कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि आखिर यह मीटू तूफान आम चुनाव के कुछ महीने पहले ही क्यों उठा? क्या ये कोई अजेंडा है? इन झूठे और आधारहीन आरोपों ने मेरी प्रतिष्ठा और सद्भावना को क्षति पहुंचाई है। झूठ के पैर नहीं होते और वह जहरीला भी नहीं होता जिसे आसानी से धोया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पत्रकार प्रिया रमानी ने यह कैंपेन एक साल पहले एक पत्रिका में लेख के माध्यम से शुरू किया था। उन्होंने मेरा नाम नहीं लिया क्योंकि वो जानती थीं कि उनकी कहानी गलत है। जब उनसे पूछा गया कि आपने नाम क्यों नहीं लिया तब उन्होंने ट्वीट में लिखा, ”नाम कभी नहीं लिया क्योंकि उन्होंने कुछ नहीं किया।
अकबर ने कहा कि अगर मैने कुछ नहीं किया तो खबर क्या है? लेकिन इन सबके बिनाह पर अटकलें और अपमानजनक माहौल खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ आरोप पूरी तरह से सुनी हुई बातों पर आधारित और निराधार हैं। जबकि अन्य लोगों ने कहा है कि मैने कुछ नहीं किया। एमजे अकबर ने कहा कि कुछ तबको में बिना किसी सबूत के आरोप लगाने की बीमारी सी हो गई है। अब मैं वापिस आ गया हूं और आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाए, इसके लिए मेरे वकील योजना तैयार करेंगे।
#MeToo: अकबर के बचाव में भाजपा, शाह बोले- ‘यौन शोषण के आरोपों की होगी जांच’
उन्होंने कहा कि गजाला वहाब ने मेरी छवि खराब करने के लिए आरोप लगाएं । उन्होंने दावा किया कि मैने 21 साल पहले दफ्तर में उनका यौन शोषण किया। एकमात्र दफ्तर जिसमें मैने गजाला वहाब के साथ काम किया वो द एशियन एज का दफ्तर था। जिसमें संपादकीय टीम एक छोटे से हॉल में काम करती थी। उस समय मेरा एक छोटा सा क्यूबिकल था, जो कि प्लाईवुड और शीशे की दीवार से घिरा था। इस पर विश्वास करना अजीब है कि इतने छोटे जगह पर कुछ हो और किसी को पता भी न चले। यह आरोप गलत, प्रेरित और आधारहीन हैं।
अकबर ने आगे कहा कि आरोपों के बावजूद भी रमानी और वहाब मेरे साथ काम करती रहीं, इससे स्पष्ट होता है कि उन्हें कोई डर और असुविधा नहीं थी। इतने सालों तक इनके खामोश रहने की वजह साफ है। बता दें कि मशहूर पत्रकार और लेखक रहे एमजे अकबर कई अखबारों के संपादक रहे हैं। उनपर अब तक 11 महिला पत्रकारों ने आरोप लगाए हैं।


Download Android App
Download iOS App



