माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा है कि मोदी सरकार ने चार साल के कार्यकाल में चुनाव पूर्व अपने वादों से मुकरने के अलावा कोई अन्य काम नहीं किया है।

येचुरी ने मोदी सरकार के चार साल पूरे होने पर एक लेख में कहा ‘‘देश से अच्छे दिनों का वादा किया गया था, साथ ही विकास और समृद्धि के जरिये देश को मजबूत और सक्षम राष्ट्र में तब्दील करने का वादा किया गया था। देश से वादा किया गया था ‘सबका साथ सबका विकास’ होगा लेकिन हर किसी के लिये यह वादे खोखले साबित हुये।’’

उन्होंने कहा कि इन सभी वादों के साथ धोखा किया गया। येचुरी ने आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक मोर्चों पर मोदी सरकार को नाकाम बताते हुये कहा कि पिछले चार सालों में लोगों की आजीविका पर अप्रत्याशित हमले हुये। देश के सामाजिक सौहार्द को नष्ट करने वाला सांप्रदायिक ध्रुवीकरण तेजी से हुआ, संसदीय लोकतंत्र, संवैधानिक प्राधिकारियों और संस्थाओं पर चौतरफा हमले बढ़े और भारत की स्वतंत्र विदेश नीति के साथ समझौता किया गया।

येचुरी ने कहा ‘‘इन परिस्थितयों के मद्देनजर यह स्पष्ट रूप से हमारे देश और लोगों पर गंभीर हमला है।’’ उन्होंने कहा कि इन चार सालों में यह सुनिश्चित हो गया है कि देश और देश के लोगों का भविष्य सिर्फ इस सरकार को बाहर का रास्ता दिखाये जाने के बाद ही सुरक्षित किया जा सकता है।

लेख के अंत में येचुरी ने मोदी सरकार के चार साल के अनुभव का हवाला देते हुये कहा कि भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर करना ही होगा। उन्होंने दलील दी कि पिछले चार साल में न सिर्फ प्रत्येक वादा खोखला साबित हुआ बल्कि संसदीय लोकतंत्र और देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र के महत्व को भी कमतर किया गया।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इस दौरान खुद को जनविरोधी और संविधान विरोधी के रूप में पेश किया है। येचुरी ने मोदी सरकार के अंतिम वर्ष में देश के लोगों से पिछले चार सालों में किये गये जनविरोधी कार्यों के हवाले से सरकार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन तेज करने का आह्वान किया जिससे इसे सत्ता से बाहर किया जा सके।

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