धन नहीं कारनामे होते हैं काले-सफेद : सचिन


राजस्थान में कांग्रेस 2018 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में पुरजोर तरीके से लगी हुई है। यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे सचिन पायलट अपनी पूरी टीम के साथ विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति बनाने में जुटे हैं। उन्होंने राजस्थान के विकास के लिए एक ‘विजन’ भी तैयार किया है जिसमें युवाओं के लिए रोजगार के साथ-साथ किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की रणनीति है। वैसे राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट जितना विधानसभा के चुनाव के लिए कमिटेड हैं उतनी ही 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी हैं। वह कहते हैं कि मोदी सरकार ने नोटबंदी की, अब जीएसटी लागू किया, लेकिन दोनों ही कामों में जितनी जल्दबाजी दिखाई, उससे फायदा होने के स्थान पर देश में स्थिरता आ गई है। जीएसटी का ठीक ढंग से अध्ययन नहीं किया गया और देश की जनता पर थोप दिया गया। जिन सेक्टर की लॉबिंग अच्छी थी, उनको जीएसटी में फायदा दे दिया और जिनके पास लॉबिंग नहीं थी, उन्हें 28 फीसदी के स्लैब में डाल दिया। नोटबंदी के बाद सरकार ने कभी नहीं बताया कि कितना कालाधन आया। यहां सचिन पायलट कहते हैं धन काला-सफेद नहीं होता, कारनामे काले-सफेद होते हैं। गाय के मुद्दे पर उनकी राय भी बहुत साफ है। कहते हैं कि पूरे देश में मंदिर और गाय को लेकर ऐसा माहौल तैयार करने की कोशिश की जा रही है जैसे भाजपा ही एकमात्र राष्ट्रवाद की ठेकेदार है। इन्हीं सब तमाम मुद्दों पर सचिन पायलट से ‘पंजाब केसरी’ के सुरेन्द्र पंडित की खरी-खरी…

  • पहले यूपीए सरकार की जीएसटी और अब भाजपा सरकार की जीएसटी में क्या फर्क है?
    जीएसटी एक कांस्पेट है जो दुनिया के 150 देशों में चल रहा है। इसकी परिकल्पना भी हमारी पार्टी ने की थी। उसमें टैक्स के 6 स्लैब नहीं थे। हमने अधिकतम टैक्स स्लैब 18 प्रतिशत का रखा था। इस 18 प्रतिशत के स्लैब वाली जीएसटी को भाजपा ने 7 साल तक रोक कर रखा, यह कह कर हम इसमें विश्वास नहीं रखते, इससे आमदनी खत्म हो जाएगी। 18 प्रतिशत वाली जीएसटी इनको पसंद नहीं आया और 28 अप्रतिशत वाले जीएसटी को लागू कर दिया है। इसमें क्रियान्वनय के लिए न तो फील्ड ट्रायल किया और न लोगों को विश्वास में लिया गया। अब रात 12 बजे भाजपा ने जीएसटी लागू किया लेकिन रात पौने दस (9:45) बजे तक जीएसटी के स्लैब फाइनल नहीं हुए थे, कुछ आइटम निकाल रहे थे कुछ डाल रहे थे। जीएसटी के पक्ष में हम हैं लेकिन हमारा विरोध यह है कि इसे पूरी प्लानिंग के साथ नहीं किया गया। इसे देश की जनता पर थोप दिया गया।                                       100 रुपए किलो टमाटर पहुंच गया, लेकिन चर्चा नहीं…
    2019 के चुनाव में इन चीजों का कोई महत्व नहीं रहेगा। देश की जनता देखेगी कि मेरी महंगाई कितनी कम हुई है। मेरे खाते में कितने पैसे आए हैं। मेरा धंधा, मेरी दुकान, मेरे किसान। इन क्षेत्रों में कितना विकास हुआ है। न कि घर वापसी, लव जिहाद, मंदिर-मस्जिद के मसले पर होगा। आज का युवा को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। उन्हें फर्क पड़ता है कि देश में रोजगार के अवसर कैसे हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी कौन सरकार देगी। इन मुद्दों पर चुनाव होगा। भाजपा सरकार भावनात्मक मुद्दों को ज्यादा हवा देती है। आज मूंग की दाल 150 रुपए किलो, टमाटर सौ रुपए किलो पहुंच गया है। लेकिन भाजपा चाहती है इन चीजों पर चर्चा न हो और भावनात्मक मुद्दों पर लगे रहें इसके लिए राममंदिर के लिए पत्थर भरतपुर से आएगा कि आगरा से आएगा जैसे मुद्दों पर लोगों को डायबर्ट कर जाए, और हमारे मीडिया के मित्र भी संकोच करते हैं कि जमीनी मुद्दे, किसान आत्महत्या, महंगाई, भ्रष्टाचार, मंदी जैसे मुद्दों को उठाया जाए।
  • बार-बार राहुल गांधी जी के लीडरशिप को लेकर सवाल उठता है, आप क्या सोचते हैं?
    अब राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव अक्टूबर में होगा। अब पूरी कांग्रेस पार्टी एकमत से अपने किसी नेता को चुनते हैं तो इतनी ज्यादा परेशानी अन्य लोगों को नहीं होनी चाहिए। आज अमित शाह को उनकी पार्टी ने चुना है तो वह उनकी छूट है। अब हम अपना नेता चुनते हैं तो बैचेनी बाकी लोगों को क्यों होती है। अभी सोनिया गांधी की अध्यक्ष हैं, उनकी अगुवाई में हमने 2004, 2009 का लोकसभा जीते हैं। 2014 का हारे हैं। हार-जीत तो एक प्रक्रिया है। और देखना 2019 में भारी बदलाव होगा।
    राजस्थान में जीएसटी से कपड़ा और मार्बल उद्योग तबाह…
    इस सरकार ने जीएसटी लागू करने से पहले पूरी तरह से अध्ययन नहीं किया। राजस्थान में जीएसटी से कपड़ा और मार्बल उद्योग तबाह हो चुका है। यहां तो जिस जिनकी लॉबिंग कामयाब रही, उनके आइटम को जीएसटी से बाहर कर दिया, जिनकी लॉबिंग अच्छी रही उन्हें कम स्लैब वाले डाल दिया और जिनकी लॉबिंग नहीं हो पाई उन्हें 28 प्रतिशत में डाल दिया। जीएसटी से जो पारदर्शिता आनी चाहिए थी, वास्तव में वह नहीं है। अब साल में 37 रिटर्न भरना होगा। ये व्यवहारिक नहीं है। इससे शार्ट टर्म में महंगाई बढ़ सकती है। ये कहते हैं ‘वन नेशन वन टैक्स’, लेकिन 6 स्लैब बना दिए हैं, वन टैक्स कहां रह गया। वास्तव में जो ओरिजन जीएसटी था, लेकिन खुद वाहवाही लूटने और जिद के चलते कि जुलाई में ही करना है। इसलिए इसे आधी-पौनी तैयारी से इसे लागू कर दिया गया। जीएसटी का हमारा सैद्धांतिक विरोध है। ऐसा नहीं की कांस्पेट गलत है, लेकिन जिस तरह से किया गया, उसमें कमियां हैं।
    हर 41 मिनट में एक किसान आत्महत्या कर रहा है…
    आज हिन्दुस्तान में हर 41 मिनट में एक किसान आत्महत्या कर रहा है। ये भारत सरकार के गृह मंत्रालय के आंकड़े हैं, मेरे नहीं है। राजस्थान के भीतर पिछले 14 दिन में 6 किसानों ने आत्महत्या कर ली। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में ‘वोट दो और ऋण माफ हो जाएगा’ की पद्धति अपना कर सरकार बना ली। उत्तर प्रदेश में 37 हजार करोड़ माफ कर दिया। महाराष्ट्र में दबाव बना तो वहां माफ कर दिया। तो जब महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब के किसानों के ऋण माफ हो सकते हैं तो राजस्थान के किसानों ने क्या पाप किया है? कृषि क्षेत्र में सरकार ने ऐसा कोई काम नहीं किया जिसको उपलब्धि के तौर पर देखा जाए।
    यह जॉबलेस ग्रोथ है…
    इस सरकार ने बहुत बड़े-बड़े वादे किए थे। पानी की समस्या लगातार बढ़ रही है। नौकरियां नहीं है। छंटनी हो रही है। यह जॉबलेस ग्रोथ है। इसके विपरीत देश में एक अलग महौल बनाया जा रहा है। गाय की रक्षा करो, गाय का रक्षक कौन है। गऊ माता की आड़ में लोग गुंडागर्दी कर रहे हैं। लोगों को मार रहे हैं। इसके दूसरी तरफ राजस्थान के जयपुर में एक सरकारी गौशाला में साढ़े चार हजार गाय मर गई। सरकार का कोई बाशिंदा नहीं पहुंचा। हम लोग वहां गए। कांग्रेस सेवा दल ने सेवा की। अपने हाथों से गाओं की सेवा की चारा खिलाया। निजी गौशालाओं में कैसे गाय पलती हैं। सरकार का कहना था कि यहां पर बीमार और बूढ़ी गाएं आती हैं। मैं कहता हूं कि गाय की किस्में देखकर सेवा होती है क्या? वास्तव में इन गायों के सेवा करने में भी भ्रष्टाचार है। देश में एक ही राज्य राजस्थान है जहां पर गाय के लिए एक अलग मंत्रालय है। गाय की सेवा के लिए सेस लगाया गया है। इसके बाद भी गाय मर रही हैं। क्या यही गाय सेवा है। हम लोग भी गाय का उतना ही सम्मान करते हैं, लेकिन उसका राजनीतिकरण नहीं करते।
  • 2019 के चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी कितनी तैयार है?
    रूलिंग पार्टी की जो सोच है कि हमें कांग्रेस मुक्त भारत बनाना है, ये तो 280 एमपी लेकर बोल रहे हैं। राजीव गांधी जी के पास 485 एमपी थे। तब भी उन्होंने कभी नहीं कहा कि भाजपा मुक्त भारत बनाना है। विपक्ष एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है हमारी प्रजातंत्र का। तो छापे डाल कर, लोगों का उत्पीडऩ करके, लोगों को डरा-धमका कर विपक्ष की आवाज को दबाना, विपक्ष को खत्म कर देना, ये जो हो रहा है। इसका जवाब जनता देगी। आखिरकार बटन दबाने का अधिकार जनता के पास ही है और जनता जर्नादन है। मुझे लग रहा है कि इस समय लोगों को पीटा जा रहा है। लोगों के बीच भय और डर का माहौल बनाया जा रहा है। भाजपा ही सिर्फ राष्ट्रवाद की ठेकेदार बने इस बात की कोशिश की जा रही है।
    दिल बड़ा होना चाहिए…
    यहां में यह बता दूं कि सत्ता में बैठे लोग समझते हैं कि तीन साल में बहुत कुछ बदल गया है लेकिन वास्तविकता में ऐसा नहीं है। क्योंकि आज भी बाबू वही है, पुलिस और प्रशासन वही हैं। अगर कुछ बदला है तो प्रधानमंत्री, मंत्री और मुख्यमंत्री के चेहरे। तो यह कहना कि पिछले सालों में भारत में कुछ काम नहीं हुआ यह बिल्कुल गलत है। आज भारत का नाम है तो यह पिछले 36 महीने में तो हो नहीं गया। आज अगर देश जी-20 और जी-7 का सदस्य है, इसे सिर्फ मोदी सरकार की उपलब्धि तो नहीं कर सकते। इसलिए सबको साथ लेकर चलने का बड़ा दृष्टिकोण रखने का, बड़ा कलेजा रखने का। सीना बड़ा हो या न हो लेकिन दिल बड़ा होना चाहिए। अपने विरोधियों को सुनने की क्षमता होनी चाहिए।
  • साल 2018 राजस्थान में विधानसभा चुनाव है, कांग्रेस की तैयारियां कैसी हैं?
    हम तो आज चुनाव के लिए तैयार हैं। एक कहावत है…जो शांति के समय पसीना बहाते हैं उन्हें युद्द के समय खून नहीं बहाना पड़ता है। तो हम लोग तो 24 घंटे, सातों दिन, 365 दिन कांग्रेस के कार्यकर्ता पूरे प्रदेश में लोगों से जीवंत सम्पर्क साधे हुए है। बूथ लेबल तक कार्यकर्ता लगे हुए हैं। हम लोग सामूहिक रूप से चुनाव की तैयारियों में लगे हैं। कांग्रेस पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं ने इस चुनाव को चुनौती के रूप में लिया हुआ है। चुनाव में लोगों का आर्शीवाद कांग्रेस पार्टी को मिला हुआ है।
  • नोटबंदी का आप क्या असर देखते हैं?
    देखिए नोटबंदी के जितने फायदे गिनाए गए थे, उनमें से एक भी सामने आया हो तो बताइए। क्या काला धन खत्म हो गया। क्या करप्शन खत्म हो गया। अब 200 का नोट आ रहा है। 2 हजार का नोट आ ही चुका है। 500 और 100 के हैं ही, तो एक हजार के नोट में क्या दिक्कत थी। इस सरकार ने यह कभी नहीं बताया। देखिए… धन काला-सफेद नहीं होता, कारनामे काले-सफेद होते हैं। आप काम क्या करते हो वह काला-सफेद हो सकता है लेकिन एक रिक्शा चलाने वाले का धन क्या कभी काला-सफेद हो सकता है क्या?
    एनसीआरबी के आंकड़ों में राजस्थान बलात्कार में नंबर तीन पर…
    मैं अगर राजस्थान की बात करूं तो साढ़े तीन साल हो गए हैं भाजपा सरकार को, इस दौरान प्रदेश में 66 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। चार यूनिवसिर्टी बंद हो चुकी है। हिन्दुस्तान में जितने बलात्कार होते हैं, नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) का डेटा है कि राजस्थान का आंकड़ा नंबर तीन पर है। दलितों के साथ उत्पीडऩ, शोषण, क्राइम है, उसमें भारत में राजस्थान का नम्बर दो है और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के खिलाफ अपराध और शोषण में राजस्थान नम्बर वन पर है। तो ये काम हुआ साढ़े तीन साल में है? हमारा जो विरोध है वह सैद्धांतिक है। हम व्यक्तिगत लांछन नहीं लगाते हैं। किसी का कैरेक्टर एसोसिएशन नहीं करते। हम सरकार की गर्वेंस, गलत नीतियों का विरोध करते हैं। प्रदर्शन करते हैं। आज राजस्थान में 200 में से कांग्रेस के सिर्फ 24 विधायक हैं, लेकिन इसके बाद भी सरकार के नकेल डाल कर रखी है, ताकी वह अपने बहुमत को मनमानी करने का लाइसेंस न मान लें।
  • क्या वास्तव में मोदी के खिलाफ तमाम राजनीतिक पार्टियां एकजुट होना चाहिए?
    विपक्ष की एकजुटता बहुत जरूरी है। क्योंकि जो गैर बीजेपी नेता है चाहे वह हरीश रावत, भूपेन्द्र हुड्डा, सोनिया गांधी, ममता बनर्जी, केजरीवाल हों… उन सब पर सीबीआई, ईडी की छापेमारी और केस चल रहे हैं। ये लोग कहते हैं कि कानून अपना काम करेगा। लेकिन नहीं यहां तो कानून एक आंख खोल कर और एक आंख बंद करके काम कर रही है। खैर जनता तो देख ही रही है। इसलिए विपक्ष एकजुट होगा और हो रहा है। मुझे लगता है कि आने वाले चंद महीनों में विपक्ष और मजबूत होगा।
    मजबूत विपक्ष देशहित में…
    कोई भी देश तभी मजबूत होता है जब विपक्ष मजबूत होता है। वर्तमान सरकार विपक्ष को खत्म करना चाहती है। यहां संवाद नहीं हो रहा है बल्कि संवादहीनता हो रही है। यह लोग विपक्ष को कुचलना चालते हैं।
    किसानों का दर्द समझने वाला कोई नहीं…
    यहीं नहीं गेहूं पर आयात शुल्क 25 फीसदी था, जिसे पिछले साल दिसम्बर में केन्द्र सरकार ने जीरो कर दिया। इससे ऑस्ट्रेलिया और यूक्रेन का गेंहू यहां आ रहा है तो पंजाब और मध्य प्रदेश का गेहूं बराबर हो गया। जबकि यहां हमारी लागत ज्यादा है, तो कौन खरीदेगा। मोदी सरकार ने बिल्कुल किसान विरोधी नीतियां अपनाई हुई है। इसका कारण यह है कि भाजपा शासित प्रदेशों में किसानों का दुख-दर्द समझने वाला कोई नहीं है।