गुजरात हाईकोर्ट ने स्पेशल एसआईटी कोर्ट के आदेश को पटलते हुए शुक्रवार को गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी को बरी कर दिया। एसआईटी कोर्ट के आदेश में नरोदा पाटिया साम्प्रदायिक दंगा में माया कोडनानी को मुख्य साजिशकर्ता करार दिया गया था।

आपको बता दे कि बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी को इस मामले में दोषी करार दिया है। गौरतलब है कि नरोदा पाटिया इलाके में अल्पसंख्यक समुदाय के 97 लोगों को जिंदा जला दिया गया था।

नरोदा पाटिया नरसंहार मामले में निचली अदालत ने राज्य की पूर्व मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की तत्कालीन महिला विधायक माया बेन कोडनानी दोषी करार दिया था। पर हाई कोर्ट ने उनको संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। हाई कोर्ट ने विशेष अदालत की ओर से 2012 में दोषी करार दिए गये 32 में से 12 लोगों को तो दोषी माना पर बाकी लोगों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इन 32 में से एक की मौत हो चुकी है।

निचली अदालत की ओर से बरी किए गए 29 लोगों में से तीन को भी हाई कोर्ट ने दोषी करार दिया। उनकी सजा के मामले पर अगले महीने अलग से सुनवाई होगी। हाई कोर्ट ने प्रमुख आरोपी और तत्कालीन बजरंग दल नेता बाबू बजरंगी, प्रकाश राठौड़ और सुरेश लंगड़ो को मुख्य आरोपी करार दिया पर उनकी सजा को भी बाकी दोषियों की तरह एक समान 21 साल कर दिया। निचली अदालत ने बजरंगी को मृत्यु तक उम्रकैद की सजा दी थी।

एक खबर के अनुसार बीजेपी गुजरात प्रदेश अध्यक्ष जीतू वाघाणी ने नरोदा पाटिया जनसंहार केस में कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पार्टी अपनी जरूरत के हिसाब से कोडनानी का इस्तेमाल करेगी। जीतू वाघाणी ने कहा वह कल भी पार्टी की वर्कर थीं, आज भी है और आगे भी रहेंगी। वह हमेशा सक्रिया कार्यकर्ता की तरह काम करती हैं और पार्टी अन्य कार्यकर्ताओं की तरह उनकी ईच्छा के हिसाब से उनको जिम्मेदारी सौंपेगी। राज्य के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने भी कहा है कि कोडनानी को पार्टी में उनकी इच्छा के हिसाब से जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। उन्होंने कहा कि कोडनानी को केस में गलत तरीके से शामिल कर लिया गया था।

आपको बता दें माया कोडनानी की छवि एक तेज-तर्रार नेता के रूप में रही है, वो गुजरात की मोदी सरकार में मंत्री थीं, वो तीन बार विधायक रह चुकी हैं, 1995 में अहमदाबाद निकाय चुनावों में सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने अपना सियासी सफर शुरू किया था। उसके तीन साल बाद ही 1998 में वो पहली बार एमएलए बनीं। पेशे से वो एक गाइनकालजिस्ट हैं, लेकन बहुत वक्त पहले ही उन्होंने अपना पेशा मुख्य रूप से छोड़ दिया था।

बंटवारे से पहले माया का परिवार पाकिस्तान से सिंध प्रांत में रहता था लेकिन बंटवारे के बाद माया का पूरा परिवार गुजरात में आकर बस गया। माया कोडनानी पर शुरू से ही असर आरएसएस का रहा, वो आरएसएस की एक दिग्गज कार्यकर्ता के रूप में जानी जाती थीं।

आपको बता दे कि गोधरा में 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में हुए अग्निकांड के अगले ही दिन विश्व हिंदू परिषद के बंद का ऐलान किया था। 28 फरवरी 2002 को विश्व हिंदू परिषद के बंद दौरान नरोदा पटिया में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे। उग्र भीड़ ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर हमला कर दिया था, जिसमें 97 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 33 लोग घायल हो गए। नरोदा पाटिया नरसंहार को गुजरात दंगों के दौरान हुआ सबसे भीषण नरसंहार बताया जाता है।

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