NCLT ने किया जेपी इन्फाट्रेक को दिवालिया घोषित , 32 हजार फ्लैट खरीदार संकट में


राष्ट्रीय कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल की इलाहाबाद बेंच ने IDBI बैंक की याचिका को स्वीकार करते हुए जेपी इन्फाट्रेक को दिवालिया कंपनियों की श्रेणी में डाल दिया है । यानि जेपी इंफ्राटक के दिवालिया घोषित होनी की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

अधिकरण ने चार्टर्ड एकाउंटेंट अनुज जैन को प्रस्ताव बनाने के लिए अधिकृत कर दिया है। अधिकरण के इस आदेश से नोएडा व ग्रेटर नोएडा सहित दिल्ली-एनसीआर में जेपी बिल्डर्स द्वारा विकसित की जा रही आवासीय कालोनियों पर ग्रहण लग गया है।

अधिकरण ने बैंक की याचिका को मंजूर करते हुए ‘साल्वेंसी एंड बैंकरप्टसी कोड’ के तहत प्रस्ताव तैयार कर अधिकरण के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। बैंक ने अधिकरण में यह याचिका 52 करोड़ 61 लाख 14 हजार 627 रुपये बकाए का भुगतान न करने पर कोड की धारा-7 के तहत दाखिल की है। अधिकरण ने आदेश की प्रति उन सभी वित्तीय संस्थानों जिन्होंने इस कंपनी में निवेश/ऋण दिया है, को भेजने का निर्देश दिया है।

जेपी इन्फाट्रेक का मामला आरबीआई की तरफ से पहचान किए गए 12 मामलों में शामिल है, जिस पर बैंकों को सलाह दी गई है थी वे दिवालिया प्रक्रिया एनसीएलटी में शुरू करें।

इस सूची में जेपी इन्फाट्रेक के अलावा मोन्नेट इस्पात, ज्योति स्ट्रक्चर्स, इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स, एमटेक ऑटो, एस्सार स्टील, भूषण स्टील, भूषण पावर और स्टील, लैन्को इन्फाट्रेक, एबीजी शिपयार्ड, आलोक इंडस्ट्रीज और ईरा इन्फ्रा ऐंड इंजिनियरिंग शामिल है।

बता दे कि 8,365 करोड़ रुपए के कर्ज में फंसी कंपनी को अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए अब 270 दिनों का समय दिया जाएगा यदि इस बीच कंपनी की वित्तीय स्थिति नहीं बदली तो उसकी संपत्ति जब्त हो जाएगी।

बता दे कि जेपी बिल्डर्स नोएडा व ग्रेटर नोएडा में 32 हजार आवासीय फ्लैट बना रहा है। अलीगढ़, आगरा और गौतमबुद्धनगर में इसकी पांच टाउनशिप की बड़ी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। अधिकरण के इस आदेश से कंपनी की सभी योजनाओं पर ग्रहण लग गया है। तो वहीं इस ग्रुप से आवासीय कालोनियों में फ्लैट खरीदने का सौदा करने वाले हजारों ग्राहकों की रकम भी फंस गई है।

वही इस ख़बर के सामने आने के बाद शुक्रवार को फ़्लैट ख़रीदारों ने नोएडा सेक्टर- 128 स्थिति जेपी ग्रुप के कॉरपोरेट ऑफिस के सामने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया ।