प्रधानमंत्री मोदी की नसीहत बेअसर : जमीयत


नयी दिल्ली : देश में गोरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान की पृष्ठभूमि में देश के प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने आज कहा कि ऐसा लगता है कि मोदी के बयान का ऐसे तत्वों पर कोई असर नहीं हो रहा है, इसलिए सरकार की ओर से इनके खिलाफ सख्त कार्वाई किए जाने की जरूरत है। मोदी ने बीते गुरूवार को गुजरात के साबरमती आश्रम में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि गाय की रक्षा के नाम पर हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता और इस तरह के कृत्य राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों के विरूद्ध हैं।

पीएम मोदी की बात का असर नहीं
प्रधानमंत्री के इस बयान पर जमीयत प्रमुख सैयद अरशद मदनी ने कहा, “प्रधानमंत्री का बयान अपनी जगह जायज है, लेकिन ऐसा लगता है कि उनकी बात का इन तत्वों पर असर नहीं हो रहा है। उनके बयान के तत्काल बाद झारखंड में एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। उन्होंने पहले भी गोरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों के खिलाफ बयान दिया था, लेकिन उसके बाद भी इस तरह की घटनाएं लगातार होती रहीं।”

घटनाओं को सख्ती से रोकने की जरूरत
मदनी ने कहा, “हमारा मानना है कि बयान से बहुत ज्यादा असर नहीं होने वाला है। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की जरूरत है। हमारी मांग है कि सरकार उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे जो लोगों पर गाय और गोमांस के नाम पर हमले कर रहे हैं। सरकार के स्तर पर कार्वाई के जरिए ही इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है।”

उन्होंने कहा, “यह बात हमें समझने की जरूरत है कि भाईचारे और अमन के बिना देश की तरक्की मुमकिन नहीं है। उम्मीद करते हैं कि देश की सरकार और लोग इस बात को समझेंगे।” प्रधानमंत्री का यह बयान गोरक्षा के नाम पर हिंसा की बढ़ती घटनाओं की पृष्ठभूमि में आया है। पिछले साल अगस्त में भी प्रधानमंत्री ने गोरक्षकों को लेकर सख्त बयान उस वक्त दिया था जब गुजरात में कथित गोरक्षकों द्वारा कुछ दलितों को बेरहमी से पीटा गया था।

पिछले दिनों मथुरा जा रही एक ट्रेन में एक मुस्लिम लड़के की कुछ लोगों ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी। आरोप है कि हमला करने वालों ने युवक और उसके साथ के लोगों पर फब्तियां कसीं और उनको ‘गोमांस खाने वाले’ और ‘देशद्रोही’ कहा। भीड़ द्वारा लोगों की पीट-पीटकर हत्या किए जाने के विरोध में बीते बुधवार को देश के कई स्थानों पर ‘नॉट इन माई नेम’ नाम से प्रदर्शन हुए थे जिनमें हजारों लोग शामिल हुए थे।

गाय को ‘राष्ट्रीय पशु ‘घोषित किया जाए
मदनी ने अपनी यह मांग फिर दोहराई कि गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित किया जाए। उन्होंने कहा, “सरकार को गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के लिए कानून लाना चाहिए और इस कानून को पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए ताकि बहुत सारी चीजें स्पष्ट हो जाएं। हमें लगता है कि इस तरह के कानून से हिंसा पर रोक लगेगी।”