अब लंदन, न्यूयॉर्क की तरह कोलकाता में भी नदी के अंदर चलेगी मेट्रो


नई दिल्ली : देश की पहली अंडरवाटर टनल (सुरंग) कोलकाता में हुगली नदी के नीचे बन रही है। कोलकाता मेट्रो के दूसरे चरण के तहत इस सुरंग का निर्माण जापान के सहयोग से भारतीय रेल द्वारा किया जा रहा है। इसके पूरा होने पर कोलकाता का नाम विश्व के उन चुनिंदा महानगरों में शामिल हो जाएगा जहां मेट्रो की लाइन नदी के अंदर से गुजरी है।

हुगली नदी के नीचे दोहरी सुरंग की लंबाई 520 मीटर
रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार हुगली नदी के नीचे बनाई जा रही दोहरी सुरंग की लंबाई 520 मीटर है। प्रत्येक सुरंग का भीतरी व्यास 5.55 मीटर और दीवार की मोटाई 275 मिलीमीटर है। ये नदी की तलहटी से 13 मीटर नीचे हैं। एक सुरंग का काम 21 अप्रैल, 2016 को और दूसरी का 12 जुलाई 2016 को हावड़ा मैदान से शुरू हुआ था। लेकिन विभिन्न अड़चनों के कारण इन्हें नदी तक पहुंचने में एक साल का समय लग गया।

बीते 22 मई को इनमें से एक की मशीन ने नदी को पार कर लिया था। अब बाकी कार्य के भी तेजी से पूरे होने की संभावना है। हुगली सुरंग पूरा होने से नदी के पश्चिमी ओर स्थित हावड़ा स्टेशन पूर्व में स्थित महाकरन, सियालदह, फूल बागान, साल्टलेक स्टेडियम, बंगाल केमिकल्स, सिटी सेंटर, सेंट्रल पार्क, करुणामई और साल्ट लेक सेक्टर-5 स्टेशनों से जुड़ जाएंगे। इन स्टेशनों के बीच रोजाना हजारों कोलकातावासियों का आवागमन होता है।

हावड़ा और सियालदह स्टेशनों के बीच मेट्रो संपर्क स्थापित होने से उत्तरी 24 परगना, दक्षिणी 24 परगना और नाडिया जिले के हजारों यात्रियों का रोजाना का सफर आसान हो जाएगा। कोलकाता मेट्रो रेल के दूसरे चरण की परियोजना जापान के सहयोग से पूरी की जा रही है। इस पर आने वाली लगभग 5000 करोड़ रुपये की लागत जापान बैंक ऑफ इंटरनेशनल कोऑपरेशन (जेबीआइसी) के वित्तीय सहयोग से पूरी की जाएगी।

दूसरा चरण लगभग 16.34 किलोमीटर लंबा
दूसरा चरण लगभग 16.34 किलोमीटर लंबा है। इसमें कुल 12 स्टेशनों का निर्माण होगा। इनमें आधे जमीन के भीतर और आधे खंभों पर (एलिवेटेड) होंगे। दूसरे चरण के 2018 तक पूरा होने की उम्मीद है। हुगली सुरंग के साथ ही कोलकाता का नाम लंदन, न्यूयार्क, सैन फ्रांसिस्को, सिंगापुर और हांगकांग जैसे विश्व के उन विकसित शहरों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा जहां मेट्रो की लाइन नदी के नीचे से निकाली गई है।