पर्यावरण संरक्षण सरकार की प्राथमिकता


रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आज यहां देश के सबसे बड़े फ्रेश वाटर इक्वेरियम का उद्घाटन करने के बाद कहा कि पर्यावरण संरक्षण सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। दास ने कहा कि विकास हमेशा पर्यावरण सापेक्ष होना चाहिए। पर्यावरण और लोगों के बीच सीधा संबंध होना चाहिए। झारखंड के लोगों का प्रकृति के प्रति विशेष प्रेम रहा है। भारतीय संस्कृति में भी इनका विशेष स्थान रहा है। पर्यावरण संरक्षण में भी भारत दुनिया को राह दिखाता रहा है।

उन्होंने कहा कि रांची में मछलीघर के खुलने से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बच्चों को भी काफी जानकारियां मिलेंगी और उनका दृष्टिबोध व्यापक होगा। उन्होंने आज ओरमांझी में भारत के सबसे बड़े फ्रेश वाटर इक्वेरियम (रांची मछली घर) का उद्घाटन तथा इको पार्क का शिलान्यास के दौरान यह बातें कहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज झारखंड के पर्यटन में नया अध्याय जुड़ा है। आज के बाद झारखंड को देश के सबसे बड़े मछली पार्क के लिए जाना जाएगा।

यहां देश-विदेश की विभिन्न प्रजातियों की मछलियां रखी गई हैं। शहर के भीड़ भाड़ और तनावपूर्ण जीवन से दूर लोग यहां अपने परिवार के साथ आकर सुकून का समय बिता सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई काम कर रही है। इसी कड़ी में इको पार्क का शिलान्यास किया गया है। यहां रोज गार्डन, चिल्ड्रन जोन, भूल भुलैया, झरना, फव्वारा आदि रहेंगे। पास ही तितली पार्क भी बनाया जा रहा है।

यहां विभिन्न प्रजातियों की रंग-बिरंगी तितलियां रहेंगी। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की विश्व चिन्ता को कम करने में वनों की अहम भूमिका है। इको पार्क पारिस्थितिकीय संतुलन का अद्भुत उदाहरण बनेगा। इको पार्क वन्य जीवन को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता का प्रतीक होगा। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव इंदु शेखर चतुर्वेदी ने बताया कि भगवान बिरसा मुंडा जैविक उद्यान परिसर स्थित मछली घर 36000 वर्ग फुट में फैला है। 58 फिश टैंक में 120 प्रजाति की लगभग 1500 मछलियां यहां प्रदर्शित की गई हैं।

ए शाकाहारी, मांसाहारी, सर्वाहारी व अपमार्जक श्रेणी की हैं। यहां भारत के अलावा बैंकाक, सिंगापुर से भी मछलियां मंगाई गई हैं। इको पार्क को 5.67 करोड़ रुपए में 4.99 एकड़ में विकसित किया जा रहा है। कार्यक्रम में रांची के सासंद रामटहल चैधरी, खिजरी विधायक रामकुमार पाहन, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव इंदु शेखर चतुर्वेदी समेत बड़ी संख्या में अधिकारी और स्थानीय लोग उपस्थित थे।