दार्जिलिंग में फिर भड़की हिंसा, पुलिस चौकी में तोडफ़ोड़


दार्जिलिंग : गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के कार्यकर्ता तुसी बूटिया की कल रात कथित रूप से सुरक्षा बलों की गोलीबारी में मौत की घटना के बाद दार्जिलिंग हिल्स में आज हिंसा भड़क उठी और गोरखालैंड आंदोलनकारियों ने सोनादा थाने का घेराव किया और सुरक्षा बलों पर पथराव किया। पुलिस ने हिंसा पर उतारू भीड़ को खदेडऩे के लिए आंसूगैस के गोले छोड़े और रबर की गोलियां चलाई। रिपोर्ट मिलने तक थाने का घेराव जारी था।

दूसरी तरफ पृथक गोरखालैंड की मांग को लेकर दार्जिलिंग हिल्स के विभिन्न राजनीतिक दलों के संयुक्त संघ गोरखालैंड आंदोलन समन्वय समिति(जीएमसीसी) के आह्वान पर अनिश्चिकालीन बंद आज 23वें दिन में प्रवेश कर गया। जीएनएलएफ के नेता नीरज जिम्बा ने आरोप लगाया कि तुसी की मौत कथित रूप से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की गोलीबारी में कल रात करीब 11 बजे उस समय हुई, जब वह दवाएं लेने जा रहा था।

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तुसी की मौत की खबर फैलते ही लोग सड़कों पर उतर आए
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने उस समय गोलियां चलाई, जब कुछ बदमाश एक कार में तोडफ़ोड़ कर रहे थे। दार्जिलिंग जिला प्रशासन और पुलिस ने सोनादा में सुरक्षा बलों द्वारा गोलीबारी किए जाने का खंडन किया है। मृतक के परिजनों ने इस मामले में सोनादा थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी है। तुसी की मौत की खबर फैलते ही घटना के विरोध में युवकों और महिलाओं का समूह सड़कों और गलियों में उतर आये और यातायात जाम कर दिया।

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जीजेएम तुसी की मौत का आरोप सुरक्षा बलों पर लगाया
गोरखा जनमुक्ति मोर्चा(जीजेएम ) के सहायक सचिव विनय तमांग ने आरोप लगाया कि तुसी की मौत के साथ ही दार्जिलिंंग हिल्स में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में अब तक चार गोरखा समर्थक मारे जा चुके हैं। इस बीच राज्य के पर्यटन मंत्री गौतम देव ने सिलीगुड़ी में संवाददाताओं से कहा कि युवक की मौत दुर्भाज्ञपूर्ण है और वह यह नहीं कह सकते कि उसकी मौत कैसे हुई है, लेकिन सोनादा में सुरक्षा बलों द्वारा गोलीबारी नहीं की गयी।  उन्होंने दावा किया कि सुरक्षा बल, अद्र्ध-सैनिक बल और पुलिस के जवान उकसावे और छिटपुट हमले के बावजूद संयम बरतते हैं और वे कानूनी एवं व्यवस्था की स्थिति को बनाये रखते हैं।