सामाजिक सुरक्षा में महिला पर्यवेक्षकों की अहम भूमिका


रांची : मुख्यसचिव श्रीमती राजबाला वर्मा ने कहा कि समाज के अन्तिम पायदान में खड़े व्यक्ति तक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने में सहिया एवं महिला पर्यवेक्षिकाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। सहिया एवं महिला पर्यवेक्षिकाओं को अपनी जिम्मेदारी को तत्परता से निभाने की आवश्यकता है। नवजात बच्चों का आधार एनरोलमेंट, प्रसूता महिलाओं की ए.एन.सी. और बच्चों के टीकाकरण के कार्य ससमय कराएं। साथ- साथ संस्थागत प्रसव गुणवत्तापूर्ण तरीके से कराएं। राज्य में कुपोषण को जड़ से मिटाना  मुख्यमंत्री जी का लक्ष्य है।

इस लक्ष्य को प्राप्त करने में आपकी भूमिका सबसे अहम होगी। कुपोषित बच्चों के उत्थान हेतु आंगनबाड़ी केन्द्रों को जबावदेह बनना होगा। नौकरी नहीं बल्कि सेवा भावना से कार्य करें। मुख्य सचिव आज महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिया। बैठक के दौरान वीडियो कॉफे्रंसिंग के माध्यम से सभी जिला समाज कल्याण पदाधिकारी को कई महत्वपूर्ण दिशा निर्देश भी दिया।

मुख्य सचिव श्रीमती राजबाला वर्मा ने निदेश दिया कि आंगनबाड़ी केन्द्र में नवजात बच्चों  का आधार जेनेरेशन का कार्य संपन्न हो इस हेतु रोस्टर बनाकर कैंप लगायें ताकि एम.सी.टी.एस. (मदर एंड चाईल्ड ट्रैकिंग सिस्टम) के माध्यम से बच्चों की पहचान करते हुए उन्हें टीकाकरण तथा पोषण की खुराक ससमय दी जा सके। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि किन प्रसूता महिलाओं की प्रथम तथा थर्ड ए.एन.सी. कब करनी है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिये लिये उन्हें अस्पताल तक ले जाया जाये।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की तर्ज पर निकाय क्षेत्रों में भी निजी/सरकारी  अस्पतालों के साथ सहिया एवं सेविकाओं को टैग करें ताकि नवजात बच्चों के आधार एनरोलमेंट के कार्य किये जा सकें। उन्होंने निर्देश दिया कि नगर निकायों के पदाधिकारियों के साथ बैठकर ऐसे अस्पतालों को टैग करें जिनका ट्रेड लाइसेंस निकाय द्वारा निर्गत किया गया है। साथ ही उन्होंने वार्ड वार कैंप का आयोजन कर आधार जेनेरेशन का निर्देश दिया।

श्रीमती वर्मा ने कहा कि प्रत्येक आंगनबाड़ी केन्द्र की ड्यू लिस्ट के अनुरूप टीकाकरण का कार्य किया जाय। उन्होंने ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित सभी योजनाओं से जुड़े लाभुकों को डीबीटी के माध्यम से भुगतान किये जाए। सरकार की योजनाओं से जुड़े लाभुकों को आधार सीडिंग का कार्य भी सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में डीबीटी के माध्यम से उनका भुगतान किया जा सके।

उन्होंने सेविका/सहियाओं के मानदेय डीबीटी के माध्यम से करने का निर्देश दिया।  मुख्य सचिव ने कहा कि 6 जिलों में 10387 पोषण सखी का चयन के लिये संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि पोषण सखी का चयन जल्द से जल्द करें। राज्य को कुपोषणमुक्त करने में पोषण सखियों की भूमिका महत्वपूर्ण साबित होगी।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना एवं लक्ष्मी लाडली योजनाओं के लाभुकों का चयन कर उनका भुगतान भी डीबीटी माध्यम से सुनिश्चित किया जाए। तथा कुपोषित बच्चो की सूची आंगनबाड़ी केन्द्रवार तैयार किये जाय। बैठक में मुख्य रूप से प्रधान सचिव महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग मुखमीत सिंह भाटिया समेत विभाग के कई पदाधिकारी उपस्थित थे।