श्री अकाल तखत साहिब के फैसले को डा. दिलगीर द्वारा चुनौती


P&H highcourt

लुधियाना/ अमृतसर  : सिख पंथ से छेकने के फैसले को चुनौती देते हुए प्रसिद्व सिख इतिहासकार डा. हरजिंदर सिंह दिलगीर द्वारा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में डाली गई पटीशन पर सुनवाई करते हुए जस्टिज राजन गुप्ता की बैंच ने शिरोमणि कमेटी को जवाब तलबी करते हुए नोटिस जारी किया है कि वह 29 नवंबर को जवाब दाखिल करें।
डा. दिलगीर ने अपनी पटीशन में आरोप लगाया था कि पांच सिंह साहिबॉन में से चार सिंह साहिबॉन जत्थेदारों के पास ऐसा फैसला सुनाने का कोई भी अधिकार ही नहीं है तो उनका (सिंह साहिब) काम सिख मर्यादा की पालना करना है न कि राजसी हुक्म सुनाना। उल्लेखनीय है कि डा. दिलगीर द्वारा लिखे कुछ लेख व सिख बुद्धिजीवियों द्वारा आपत्तियां उठाये जाने के बाद श्री अकाल तखत साहिब के जत्थेदार ने पांच सिंह साहिबान की बैठक के उपरांत पंथ से छेक दिया था। जिसको डा. दिलगीर ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

सिख इतिहासकार डा. हरजिंदर ङ्क्षसह दिलगीर द्वारा श्री अकाल तखत साहिब समेत बाकी तखतों के जत्थेदारों द्वारा उनके खिलाफ जारी फैसलों को 9 नवंबर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एडवोकेट नवकीरण सिंह के जरिये पटीशन दाखिल की थी। इस पटीशन में डा. दिलगीर ने कहा था कि पांच जत्थेदारों में से चार तखतों के जत्थेदार भारतीय संविधान के अंतर्गत शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी से वेतन लेते है। उन्होंने केंद्रीय कानून सिख गुरूद्वारा एक्ट, 1925 का हवाला देते हुए कहा कि एक्ट में हेड-मिनिस्टर/जत्थेदार के पदों का जिक्र है। पटीशन में दावा किया कि हेड मिनिस्टर की ड्यूटी केवल सिख सिद्धातों व सिख रहित मर्यादा के प्रबंधों को सुनिश्चित बनाना है। वैसे भी तखत के जत्थेदारों की पिछले कुछ सालों से हुई ऐसी बैठकें व फैसलों पर लोगों को सियासी प्रभाव अधिक दिखाई दिया है। पटीशन में उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सच्चा सौदा प्रमुख गुरमति राम रहिम दशम पिता गुरू गोबिंद सिंह जी का स्वांग रचाने के तहत पहले पंथ से छेका गया।

बाद में पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर एक विशेष सियासी पार्टी के लिए वोटों के लालच में माफी नामा और बाद में सियासी दबाव के तले हुक्मनामे की वापसी हो गई थी। पटीशन के तहत डा. दिलगीर ने पांचों तखत के जत्थेदारों द्वारा 27 जुलाई को उनके धार्मिक, समाजिक व सियासी मंचख् पर बोलने पर पाबंदी लगाते हुए उनकी लिखी किताबों को पढने से रोकते हुए भारतीय संविधान के आर्टिकल 21 की घोर उल्लंघना की है। उनके अनुसार 27 जुलाई का फैसला असंवैधानिक है। पटीशन में यह भी कहा कि 2 अगस्त, 2017 को जत्थेदार श्री अकाल तखत साहिब को कानूनी नोटिस भी भेजा था। जिसका अभी तक जवाब नहीं मिला। जिस कारण से उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली।

– सुनीलराय कामरेड