सिंह साहिब ज्ञानी गुरबचन सिंह ही देंगे कौम के नाम संदेश


लुधियाना-अमृतसर  : सिखों की सर्वोच्च संस्था शिरोमणि कमेटी के प्रधान प्रो. कृपाल सिंह बडूंगर ने आज अमृतसर में पत्रकार सम्मेलन में बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि 6 जून को निर्दोष शहीदों की याद में श्री अकाल तख्त साहिब पर मनाए जा रहे घल्लूघारा दिवस के अवसर पर पहले से ही चली आ रही परंपरा अनुसार श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी गुरबचन सिंह ही कौम के नाम संदेश देंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब पर 6 जून को मनाए जा रहे घल्लूघारा दिवस शांतिपूर्वक ढंग से मनाने के लिए अलग-अलग सिख संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें की है और सभी ने समर्थन दिया है।

प्रो. बडूंगर ने यह भी कहा कि जून 1984 में दरबार साहिब श्री अमृतसर में श्री गुरू अर्जुन देव जी का शहीदी दिवस मनाने आई संगत को तत्कालीन सरकार ने टैंकों, तोपो के साथ हमला करके शहीद किया और श्री अकाल तख्त साहिब को मटियामेल कर दिया था। उन्होंने कहा कि 6 जून 1984 में शहीद होने वाले सिंह- सिंहनियों की याद में 20 फरवरी 2002 को शिरेामणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी ने समागम करवाने का फैसला लिया था। उसके उपरांत शहीदी समागम 6 जून 2003 से शुरू हुए जो अब तक जारी है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग जत्थेबंदियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करके इस दिवस पार्टीबाजी और बयानबाजी से ऊपर उठकर कौमी एकजुटता के साथ मनाने की बातचीत की गई है। प्रो. बडूंगर ने यह भी कहा कि शहीदी दिवस मनाने के लिए श्री अकाल तख्त साहिब पर सारी व्यवस्था मुकम्मल कर ली गई है।

घल्लूघारा के अवसर पर चली आ रही परंपरा के मुताबिक जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब से सिख संगत के नाम संदेश दिया जाएंगा। पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब पर उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था को बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है ताकि कोई अनहोनी घटना ना घटित हो सकें। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बाबा हरनाम सिंह खालसा प्रमुख दमदमी टकसाल द्वारा अलग शहीदी गैलरी बनाने की, की गई मांग के बारे में आंतरिक कमेटी में विचार किया जाएंगा। उन्होंने कहा कि शहीद हुए सिंहों के परिवारिक सदस्यों को श्री अकाल तख्त साहिब पर सम्मानित भी किया जाएंगा। उन्होंने एक बार फिर समूची सिख कौम को अपील करते हुए कहा कि 1984 के शहीदों की याद में करवाएं जा रहे समागम में कौमी एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए शांतिपूर्वक ढंग के साथ श्रद्धा और सत्कार भेंट करें।

– सुनीलराय कामरेड