केंद्रीय सिख अजायबघर में लगाया गया गंगा सागर वाले नवाब रायकलां का चित्र


लुधियाना-अमृतसर  : दशम पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी से गंगा सागर की बख्शीश प्राप्त करने वाले गुरू घर के मुसलमान श्रद्धालु और रायकोट के नवाब रायकलां का बड़े साइज वाला चित्र शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा आज गुरू की नगरी अमृतसर दरबार साहिब स्थित केंद्रीय सिख अजायबघर में सुशोभित किया गया।

चित्र से पर्दा हटाने की रस्म श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी गुरूबचन सिंह जी ने अरदास उपरांत की। इस अवसर पर सच्चखंड श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी साहिब ज्ञानी जगतार सिंह जी भी मौजूद थे। तस्वीर से पर्दा हटाने उपरांत संगत को संबोधित करते हुए जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह जी ने कहा, सिख इतिहास में ऐसी अनेकों शख्सियतों का जिक्र मिलता है, जिन्होंने गुरू साहिबान के प्रति अथाह श्रद्धा का प्रदर्शन करते हुए गुरू बख्शीश प्राप्त की। उनमें नवाब रायकलां जी भी एक थे।

उन्होंने कहा कि मुसिलम बादशाह औरंगजेब के अत्याचारी शासन के वक्त गुरू घर के प्रति निभाई सेवा और निष्ठा के लिए दसवे पातशाह जी ने रायकलां को गंगा सागर (सुराही), कृपाण के साथ-साथ अनमोल वस्तुएं और आर्शीवाद से नवाजा था, जो आज उनके वंशजों के पास सुरक्षित है। सिंह साहिबान ने शिरोमणि कमेटी द्वारा रायकलां जी की तस्वीर केंद्रीय सिख अजायबघर में लगाने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे संगत को गुरू साहिबान और धर्म के प्रति समर्पण की प्रेरणा प्राप्त होंगी।

– सुनीलराय कामरेड