राजस्थान बीजेपी में प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर उठा बवाल शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। इस बवाल में अब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का फैसला भी डगमगाने लगा है। बताया जा रहा है कि अमित शाह की पसंद गजेंद्र सिंह शेखावत हैं। वहीं, उनकी पसंद व सीएम वसुुंधरा राजे पसंद मेल नहीं खा रही है। सीएम वसुंधरा नहीं चाहती कि कोई राजपूत प्रदेश अध्यक्ष बने। सियासत की इस जंग में प्रदेश अध्यक्ष के चयन के लिए वसुंधरा राजे सरकार के 20 से ज्यादा मंत्रियों और 20 विधायकों ने बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय नेतृत्व पर दवाब बनाने के लिए दिल्ली में डेरा डाल रखा है। दिल्ली गए राजे सरकार के ये मंत्री और जाट विधायक शेखावत को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के खिलाफ हैं।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के पद को लेकर अब सोशल मीडिया पर भी राजनीति शुरू हो गई है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के बेटे ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को सोशल मीडिया के जरिए अपने तर्कों के आधार पर कहा है कि शेखावत जातिगत समीकरणों में फिट नहीं बैठते। उन्होंने लिखा कि राजस्थान में कांग्रेस मौजूदा वक्त में मजबूत है। संभावना जताई जा रही है कि कांग्रेस को 140 सीटें मिलेंगी। उन्होंने कहा कि समय रहते निर्णय ले लीजिए, नहीं तो देर हो जाएगी।

उन्होंने आगे लिखा कि राजस्थान में एससी-एसटी 32%, जाट 18%, मुस्लिम 10%, राजपूत 3%, ब्राह्मण 5%, बनिया 5% और ओबीसी 16% हैं। ऐसे में वोटरों की सोचना चाहिए। गजेंद्र सिंह शेखावत अध्यक्ष के लिए फिट नहीं है, कास्ट कांबिनेशन नहीं बैठेगा। हालांकि बाद में विवाद बढ़ता देख रवि शेखर ने ये पोस्ट डिलिट कर दिया।

बाद में उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि मैं भला अपनी पार्टी के अध्यक्ष के खिलाफ ऐसा कमेंट क्यों करूंगा। उन्होंने बताया कि कल दोपहर को मेरा फोन ऑफिस में रखा था, जिसमें फेसबुक लॉग इन था। ऑफिस में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता आ रहे थे। उसी दौरान किसी शरारती तत्व ने ये गलत कमेंट कर दिया। उन्होंने बताया कि वे अपने वकील से राय ले रहे हैं जल्द ही मामले में कोई कानूनी कदम उठाएंगे।

आपको बता दें कि अशोक परणामी ने 18 अप्रैल को बीजेपी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। हाल ही में लोकसभा और विधानसभा उप चुनाव में हार के बाद परणामी को अध्यक्ष पद से हटाने की मांग चल रही थी। यह हार राजस्थान में सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार की मुखिया वसुंधरा राजे के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। ऐसे में बीजेपी किसी ऐसे चेहरे को कमान देना चाहती है जो जातिगत हित साध सके।

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