राम राज्य रथयात्रा अपनी 6 हजार किमी की यात्रा के दौरान एक करोड़ हिंदुओं में अयेाध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर जनजागरण करेगी। यह रथयात्रा 39 दिनों में 6 राज्‍यों से होकर गुजरेगी। इस यात्रा में अयोध्या के संत महंत और बीजेपी के सभी विधायक सांसद और मंत्री भी शामिल होंगे। यात्रा की आयोजक संस्था श्री राम दास मिशन यूनिवर्सल सोसाइटी के अध्यक्ष स्वामी कृष्णानंद सरस्वती ने यह जानकारी सोमवार को दी। कारसेवकपुरम में उन्होंने बताया कि यात्रा का असली मकसद अयोध्या में भव्य राम मंदिर के लिए जनजागरण करना है। यह यात्रा का पहला चरण है जो अयोध्या से रामेश्वरम तक चलेगा।

रथयात्रा आज से राम राज्य कारसेवकपुरम से चलेगी जो भरतकुंड, वाराणसी और प्रयाग आदि पड़ावों से होकर 41 दिनों के बाद राम नवमी के दिन तिरुवनंतपुरम में समाप्त होगी। स्वामी कृष्णानंद ने कहा कि दूसरी रथयात्रा रामेश्वरम से शुरू होकर कश्मीर होते हुए 2019 की राम नवमी पर अयोध्या पहुंचेगी और हमें पूरा भरोसा है कि भव्य राम मंदिर में रामलला विराजमान मिलेंगे। सोसाइटी के महासचिव स्वामी श्री शक्ति शांता नंद ने बताया कि रथयात्रा को सीएम योगी आदित्यनाथ को हरी झंडी दिखाना था। पर अभी तक उनकी कोई सूचना हमें नहीं मिली है। ऐसे में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय महासचिव चंप राय इसे हरी झंडी दिखाकर अयोध्या से रवाना करेंगे।

उन्होंने बताया कि रथ यात्रा का यह 28वां साल है। इसके पहले यह यात्रा राम नवमी रथ यात्रा के नाम से निकाली जा रही थी। जो अब रामराज्य की स्थापना को लेकर निकाली जा रही है । उन्होंने कहा कि राम राज्य तभी आएगा जब राम मंदिर अयोध्या में बन जाएगा। इसीलिए सारा फोकस राम मंदिर पर कर दिया गया है। स्वामी ने बताया कि यात्रा के दौरान 10 लाख लोगों से राम मंदिर के पक्ष में हस्ताक्षर कराया जाएगा, जिसमें 5 हजार संत भी मौजूद रहेंगे। यह हस्ताक्षर का ज्ञापन पीएम और भारत के प्रेजिडेंट को सौंपा जाएगा।

उन्होंने कहा कि मुंबई महाराष्ट्र की सोसाइटी रथ यात्रा के आयोजन से पहले भी अन्य धार्मिक विषयों पर रथ यात्राएं निकलती रही हैं। उन्होंने बताया कि 24 मार्च को जब यात्रा रामेश्वरम पहुंचेगी, तो तिरुवनंतपुरम में राम राज्य महासम्मेलन का आयोजन होगा, जिसमें करीब एक लाख की भीड़ जमा होगी। स्वामी ने बताया कि यात्रा को लेकर पांच मांगों को लेकर जागरण किया जा रहा है, जिसमें राम मंदिर का अयोध्या में निर्माण, रविवार की जगह गुरुवार को साप्ताहिक अवकाश, राम राज्य की स्थापना, पाठयक्रम में रामायण के अंशों को जोड़ना और विश्व हिन्दू दिवस की घोषणा शामिल है।

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