दिल्ली उच्च न्यायालय ने मानहानि के मामले में अरविंद केजरीवाल की याचिका पर राज्यसभा सदस्य सुभाष चंद्रा और दिल्ली पुलिस को आज नोटिस जारी किये। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने इस याचिका में भाजपा नेता द्वारा उनके खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि की शिकायत रद्द करने का अनुरोध किया है।

न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की पीठ ने केजरीवाल को मानहानि से संबंधित इस मामले 11 दिसंबर को निचली अदालत में पेश होने से भी छूट दे दी। हालांकि न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल ने निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक नहीं लगायी और केजरीवाल की याचिका पर 22 जनवरी को आगे सुनवाई करने का निश्चय किया।

केजरीवाल ने निचली अदालत द्वारा व्यक्तिगत पेशी के समन पर रोक लगाने का अनुरोध किया था।  चंद्रा ने पिछले साल 17 नवंबर को दिल्ली के मुख्यमंत्री पर कथित तौर पर उनको बदनाम करने के मामले में मानहानि का मुकदमा चलाने की मांग की थी। उनका आरोप था कि केजरीवाल ने नोटबंदी को लेकर उन पर झूठे आरोप लगाए थे।

वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़ और अधिवक्ता रिषिकेश कुमार ने दिल्ली के मुख्यमंत्री की ओर से निचली अदालत का समन और शिकायत को रद्द करने का अनुरोध किया। उनका तर्क था कि चंद्रा अपने मामले को साबित करने के लिए खुद कटघरे में नहीं खड़ हुए।  वकीलों ने कहा कि चंद्रा संसद सदस्य हैं और दिल्ली में रहते हैं। वकीलों के मुताबिक राज्यसभा सदस्य को खुद कटघरे में आकर अपने मामले को साबित करना चाहिए, जैसा कि केंद्रीय मंत्रियों ने पूर्व में किया है।

हेगड़ ने कहा, अगर निचली अदालत प्रतिनिधि के जरिये दायर शिकायतों को स्वीकार कर लेता था है, जैसा कि वकालतनामा के जरिये किया गया है तो भविष्य में इससे अन्य लोगों को ऐसे हल्के मामले दर्ज करने का बल मिलेगा।

इस पर पीठ ने कहा कि निचली अदालत ने मामले में मुख्यमंत्री को आरोपी के रूप में समन करने को लेकर विस्तृत आदेश दिया है।  पीठ ने केजरीवाल के वकील से कहा, आप स्थगन की मांग कर रहे हैं। आप निचली अदालत के फैसले की खामी बताइए।  हालांकि पीठ ने कहा कि पुलिस और चंद्रा को मामले को लेकर जवाब दाखिल करने दीजिए।

अपनी याचिका में एस्सेल समूह के अध्यक्ष चंद्रा ने आरोप लगाया है कि पिछले साल 11 नवंबर को एक संवाददाता सम्मेलन में केजरीवाल ने उनके खिलाफ झूठे, मनगढ़ंत , अपमानजनक आरोप गढ़। लेटेस्ट खबरों के लिए यहां क्लिक  करें।