गोरक्षकों के तांड़व पर SC हुआ सख्त, राज्यों को 7 दिनों में टास्क फोर्स बनाने का आदेश


नई दिल्ली : देशभर में बढ़ती कथित गोरक्षकों के तांडव को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। देश की सर्वोच्च अदालत ने कथित गोरक्षकों द्वारा की जा रही हिंसा को रोकने के लिए देशभर के हर जिले में एक नोडल अफसर की तैनाती का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया है कि हर जिले में एक सीनियर पुलिस अधिकारी को नोडल अफसर बनाकर तैनात किया जाए।

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शीर्ष अदालत ने राज्यों को एक सप्ताह में अपना टास्क फोर्स बनाने के लिए कहा है, जिसमें वरिष्ठ पुलिसकर्मियों को नोडल अधिकारी के रूप में रखा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से कहा है कि वे गाय की रक्षा करने के नाम पर कानून हाथ लेने वाले समूहों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए. केंद्र का प्रतिनिधित्व करने वाले एएसजी तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि कानून किसी भी प्रकार की अनियंत्रित घटनाओं को रोकने के लिए है. जवाब में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा ने कहा ‘हम जानते हैं कि कानून हैं, लेकिन क्या कार्रवाई की गई है? आप नियोजित कार्रवाई कर सकते हैं ताकि हिंसा को बढ़ावा ना मिले.

ASG के इस जवाब पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, ‘हम जानते हैं कि कानून है, लेकिन क्या कार्रवाई की गई है?’ चीफ जस्टिस ने कहा कि सरकार सुनियोजित कार्रवाई कर सकती है ताकि गोरक्षा के नाम पर हिंसा न बढ़े। पिछले साल ऐक्टिविस्ट तहसीन पूनावाला ने कथित गोरक्षा के नाम पर हिंसा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

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इस मामले में 21 जुलाई को हुई अंतिम सुनवाई में भी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य को फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उठाए गए कदमों की रिपोर्ट मांगते हुए 6 सितंबर को सुनवाई की अगली तारीख तय की थी। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को एक हफ्ते के भीतर नोडल ऑफिसर की तैनाती का आदेश दिया है।

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तहसीन पूनावाला ने अपनी याचिका में कहा था कि गोरक्षा के नाम पर हिंसा की यह समस्या इतनी बड़ी हो गई है कि पीएम मोदी भी इसपर टिप्पणी कर चुके हैं। पीएम ने ऐसे लोगों को समाज को तोड़ने वाला बताया था। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई इस याचिका में कहा गया था कि गोरक्षा के नाम पर दलित और अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।