शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में दिया हलफनामा, राम मंदिर ही बने अयोध्या विवादित भूमि पर


श्रीराम जन्मभूमी विवाद पर यूपी के शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने नर्ई दिशा दे दी है। शिया वक्फ बोर्ड ने कहा है कि जिस बाबरी मस्जिद को ढहा गया था वह उसकी प्रॉपर्टी थी। शिया बोर्ड का कहना है कि यह स्थल विवादित है और अब वह मस्जिद को विवादित स्थल से दूर बनाना चाहते है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 11 अगस्त को सुनवार्ई होनी है। बता दें कि शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट को दिए अपने खुद के हलफनामे में यह बात कही है। इस मामले पर बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि शिया वक्फ बोर्ड ने भगवान की मर्जी से हस्तक्षेप किया है।

 

इस मामले में शिया वक्फ बोर्ड ने कहा है कि बाबरी मस्जिद शिया की प्रॉपर्टी थी। शिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि हम इस विवाद का हल शांतिपूर्ण तरीके से करना चाहते हैं। शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट को दिए अपने एफिडेविड में कहा है कि वह मस्जिद को कहीं मुस्लिम बहुल इलाके में बनाना चाहते हैं। वह चाहते हैं कि अयोध्या में श्रीराम की जन्मभूमि से कुछ दूर की दूरी पर मस्जिद बननी चाहिए। बता दें कि शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से थोड़ा समय भी लिया है। श्रीराम जन्मभूमि के मामले में निपटने के लिए वह एक कमेटी का गठन कर सकें।

​इस मामले में बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड ने भगवान की मर्जी से हस्तक्षेप किया है।

वहीं, बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक सफरयाब जिलानी ने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड का हलफनामा सिर्फ अपील है। इस अपील की कानूनी तौर पर कोई वैल्यू नहीं है।

अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले पर सुप्रीम कोर्ट में 11 अगस्त को इस पर सुनवाई होगी। बता दें कि इस मामले में जुड़े पक्षकारों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सात साल के बाद इस पर सुनवाई करने जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के एडिशनल रजिस्ट्रार द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, 11 अगस्त को दोपहर बाद तीन सदस्यीय विशेष पीछे के समक्ष इस मामले पर सुनवाई होगी।

इस मामले में पिछले दिनों भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने चीफ जस्टिस जेएस की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की गुहार लगाई थी। जिस पर चीफ जस्टिस ने कहा था कि वह जल्द ही इस निर्णय लेंगे। अब 11 अगस्त को इस मामले की सुनवाई होगी।

बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 2010 में इस विवादित स्थल के 2.77 एकड़ क्षेत्र को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर-बराबर हिस्से में बांट दी थी। और कुछ महीने पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिए थे कि दोनों पक्ष अदालत के बाहर फैसला कर सकते हैं और यह भी कहा था कि फैसले करने की संभावना तलाश लें। इस मामले में पक्षकारों ने कोशिश की लेकिन कोई भी समाधान नहीं निकल पाया। अब सुप्रीम कोर्ट को ही मेरिट के आधार पर इस विवाद का निपटारा करना है।