वायुसेना के ग्रुप कैप्टन अरुण मारवाह को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (आईएसआई) के हनीट्रैप में फंसने के बाद अब भारतीय सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल भी संदेह के घेरे में हैं। बुधवार को मिलिट्री इंटेलीजेंस ने एक बड़े अभियान के तहत इंडियन आर्मी के लेफ्टिनेंट रैंक के ऑफिसर को जासूसी के आरोपों के चलते गिरफ्तार किया है।

आपको बता दे कि यह ऑफिसर जबलपुर की ईएमई यूनिट में पोस्‍टेड था और मंगलवार रात इसके घर पर छापा मारा गया था। इस ऑफिसर पर शक है कि इसने पाकिस्‍तान की इंटेलीजेंस एजेंसी आईएसआईए के हनी ट्रैप में फंसकर कुछ अहम जानकारियां दुश्‍मन को दी हैं। हालांकि अधिकारियों ने शुरुआत में इस मामले पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया था।

इससे पहले 9 फरवरी को दिल्ली पुलिस ने वायुसेना के ग्रुप कैप्टन अरुण मारवाह को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसिस इंटेलिजेंस (आईएसआई) को गोपनीय सूचनाएं देने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

ग्रुप कैप्टन की गतिविधियां संदिग्ध पाए जाने के बाद 31 जनवरी को वायुसेना ने उन्हें जांच के लिए हिरासत में लिया था। वायुसेना ने मामले की जांच के लिए दिल्ली पुलिस से संपर्क किया था। पुलिस के मुताबिक, मारवाह (51) ने दो पाकिस्तानी एजेंटों से सूचना व दस्तावेज साझा किए हैं।

एजेंट उनके साथ सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर महिला बनकर चैट कर रहे थे। उन्हें लुभाने के लिए फर्जी अकाउंट ‘किरण रंधावा’ व ‘महिमा पटेल’ के नाम से बनाया गया था। सेना के लिए सोशल मीडिया पर सक्रिय होने के लिए एक सख्त नियम है, जिसके तहत सैनिकों को अपनी पहचान, पद, तैनाती और अन्य पेशेवर विवरण साझा करने पर पाबंदी है। वर्दी में तस्वीर भी लगाने पर पाबंदी है।

दिसंबर 2015 में दिल्ली पुलिस ने एक बर्खास्त वायुसेना अधिकारी को पाकिस्तानी इंटर सर्विसिस इंटेलिजेंस (आईएसआई) द्वारा समर्थित जासूसों को कथित तौर पर सूचना साझा करने के लिए गिरफ्तार किया था।

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