अखिलेश की चेतावनी- कप्तान अपनी हैसियत में रहे


Akhilesh Yadav

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गत छह जनवरी को फेंके गये आलू के सिलसिले में हुई गिरफ्तारी के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की प्रेस कांफ्रेंस से तमतमाये समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चेतावनी दी है, ‘कप्तान अपनी हैसियत में रहे।’

अखिलेश यादव ने पत्रकारों से कहा कि कप्तान को अपराधियों की गिरफ्तारी करनी चाहिये। किसानों को गिरफ्तार कर वह अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। क्या वह किसानों को आलू की कीमत दिलवा सकते हैं। किसानों के लिये आन्दोलन करुंगा। साइकिल चलाऊंगा।

उन्होंने कटाक्ष किया कि सरकार बनने पर किसानों की गिरफ्तारी करवाने वाले वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (कप्तान) को यशभारती से सम्मानित करुंगा। आलू फेंकने वालों का बचाव करते हुए सपा अध्यक्ष ने कहा कि ऐसा करने वालों ने आंदोलन किया है। सरकार और जनता का ध्यान किसानों की समस्याओं की ओर आकर्षित किया है।

उन्होंने कहा गिरफ्तार लोग यदि सपा से चुनाव लड़ चुके हैं तो इसमें बुराई क्या है। वह तो अपनी पार्टी के नेताओं से कहेंगे कि जिलाधिकारियों को एक-एक बोरा आलू उपहार में दें। राज्य में किसानों की समस्यायें बढ़ी हैं। भाजपा को बताना चाहिये कि कितने किसानों की मदद की गयी। सपा अध्यक्ष ने कहा कि कोल्ड स्टोरेज के मालिक भी संकट में हैं।

किसानों ने आलू फेंककर सरकार का ध्यान आकर्षित किया तो उनकी गिरफ्तारी करवा दी गयी। किसानों को आलू की कीमत नहीं मिल रही है। कोल्ड स्टोरेज से किसान आलू नहीं निकाल रहा है। नयी फसल आ गयी है। आलू किसानों की समस्या हल करने के बजाये उनकी गिरफ्तारी करवायी जा रही है। पुलिस की मदद से किसानों को परेशान करवाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बच्चियों के साथ घटनाएं हो रही है। घटना करने वालों को पकड़ने के बजाय किसानों को प्रताड़ित किया जा रहा है। किसान बर्बाद हो गया है। गन्ने की कीमत नहीं मिल पा रही है। उन्होंने बताया कि आगामी 27 जनवरी को किसानों और जनता की अन्य समस्याओं को लेकर तहसील स्तर पर धरना दिया जायेगा और खासतौर पर बुंदेलखण्ड इलाके में परेशानी पैदा कर रहे अन्ना जानवर जिलाधिकारी को उपहार में दिये जायेंगे।

गौरतलब है कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार राय ने आज संवाददाता सम्मेलन में आलू फेंकने वालों की गिरफ्तारी की सूचना दी।  राय ने गिरफ्तार दो लोगों को सपा का कार्यकर्ता बताया। उनके अनुसार आलू फेंकने के मामले में छह लोग शामिल थे। उनका कहना था कि आलू फेंकने की घटना राजनीतिक नहीं अपराधिक कृत्य है।

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