अवैध हथियार बनाने की फैक्ट्री पकड़ी


फीरोजाबाद: क्राइम ब्रांच, थाना रामगढ़ पुलिस की टीम ने रात्रि में मुखबिर की सूचना पर शीतल प्रकाश बौद्ध रैपुरा कालौनी की एक कोठरी में चल रही असलाहा बनाने की फैक्ट्री पर छापामार कार्यवाही करते हुए दो अभियुक्तों सहित भारी मात्रा में बने हुए असलाहा, व अध बने असलाहों सहित बनाने वाले उपकरण भी बरामद किये हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय कुमार पाण्डे ने वार्ता के दौरान बताया कि विगत काफी दिनों से सूचना मिल रही थी कि रामगढ क्षेत्र में असलाह बनाने का काम किया जा रहा है। नगर पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह, क्षेत्राधिकारी नगर डा0 अरूण कुमार सिंह के निर्देशन में प्रभारी निरीक्षक रामगढ़ प्रवीन्द्र कुमार, क्राइम ब्रान्च प्रभारी शैलेन्द्र सिंह की टीम में शामिल उ0नि0 सुम्मेर सिंह, का0 दिनेश कुमार, मुकेश कुमार, विशाल शिकेरा, नदीम खानं, अरूण कुमार, अमित उपाध्याय गिर्राज यादव व मुकेश कुमार आदि द्वारा रात्रि में कार्यवाही करते हुए शीतल प्रकाश बौद्ध रैपुरा कालोनी की एका कोठरी में छापा मार कार्यवाही करते हुए मौके से आनन्द पुत्र ओंकार सिंह निवासी भूडा भरथरा थाना सिरसागंज, थाना रामगढ़ क्षेत्र के सम्राट नगर निवासी आसिफ पुत्र अनबर को मौके से दबोच लिया।

जिनका एक साथ भागने में सफल रहा। पुलिस ने मौके से 315 बोर के नौ तमंचे बने हुए, एक तमंचा 12 बोर, अधना तमंचा एक आरी मय ब्लेड, ड्रिल मशीन, पंखा भट्टीवाल, ग्लिाइण्डर, रोड तमचा, हथौडा तीन रेती दो, पेचकर, छैनी, सुम्मा, सड़ासी लोहे की नाले आधा दर्जन के साथ कई अधबने तमंचे मौके से बरामद किये। पकड़े गये अभियुक्तों ने पूछताछ में बताया कि हम लोग अवैध असलाहों का निर्माण कर एक तमंचा 15 सौ से लेकर दो हजार तक बैच देते है। उक्त तैयार असलाहों को बैचने के लिए अलग-अलग क्षेत्र में लड़के लगे रहते है। क्षेत्रीय डिमाण्ड के आधार पर असलाह बनाकर पार्टी को देते है। एसएसपी श्री पांडेय ने बताया कि आने वाले निकाय चुनाव के चलते उक्त असलाहों को प्रयोग में लाया जाना था। इससे पूर्व ही अभियुक्तों को गिरफ्तार करने के बाद फैक्ट्री का सामान बरामद कर लिया। एसएसपी के द्वारा अभियुक्तों को पकडऩे वाली टीम को पांच हजार का नगद पुरस्कार दिया गया। वही 15 हजार रूपये का पुरस्कार के लिए आईजी आगरा को पत्र लिखा गया है। वार्ता के दौरान नगर पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह, क्षेत्राधिकारी नगर डा0 अरूण कुमार सिंह मौजूद थे।

– संजीव कुमार भोला