ट्रैक से उतरा मालगाड़ी का पहिया, ट्रेनें प्रभावित


सिंभावली: मुरादाबाद के लिए जा रही मालगाड़ी के एक डिब्बे का पहिया अचानक सिंभावली के गांव नवादा मार्ग पर स्थित फाटक के निकट पटरी से उतर गया। ट्रेन के चालक द्वारा ट्रेक के बीच में पडऩे वाली मध्य गंगनहर को पार करने के बाद गांव बृहमगढ़ी के निकट गाड़ी को रोक दिया गया। रेलवे ट्रेक से पहिया उतरने जाने की सूचना पर रेलवे के आला अधिकारियों में हड़कंप मच गया। सूचना पर सीनियर डीएमई मुरादाबाद, सीडीओ मुरादाबाद भी मौके पर पहुंच गये। अधिकारियों की उपस्थिति में ट्रैक से उतरे पहियों को सही करने के बाद मालगाड़ी को सिंभावली रेलवे स्टेशन पर खड़ा किया गया। जबकि रेल का पहिया उतरने के कारण मुरादाबाद से दिल्ली जबकि दिल्ली से मुरादाबाद की और जाने वाली दर्जनों ट्रेनें बाधित हो गयीं। जबकि गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र में रूट डायवर्जन होने के कारण सुबह के समय क्षेत्र से दिल्ली जाने वाले व्यापारियों और कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

लगभग पांच घंटे के बाद दिल्ली-मुरादाबाद डाउन लाइन को शुरू किया गया। गढ़मुक्तेश्वर के सिंभावली रेलवे स्टेशन पर 24 जुलाई से दिल्ली की ओर से आई एक मालगाड़ी खड़ी हुई थी। रविवार की सुबह छ: बजे ट्रेन का चालक राकेश ट्रेन को लेकर मुरादाबाद की और चला। जैसे ही ट्रेन स्टेशन से कुछ ही दूरी पर फाटक नम्बर-57 सी के निकट पहुंची तो ट्रेन के 12 नम्बर के डिब्बे में चालक को कुछ खराबी महसूस हुई और इसके पहले की चालक कुछ समझ पाता डिब्बे के अगले हिस्से के पहिये ट्रैक से उतर गये थे। जबकि ट्रेन का इंजन तब तक फाटक नम्बर 57 सी के निकट रेलवे लाइन के बीच में स्थित मध्य गंगनहर का पुल पार कर चुका था। ट्रैक से पहिया उतरने के बाद चालक ने ट्रेन को फाटक नम्बर 56 सी गांव बृहमगढ़ी के निकट रोक दिया।

ट्रेन को रोकने के बाद चालक ने रेलवे स्टेशन पर संपर्क कर अधिकारियों को इस संबंध में जानकारी दी। ट्रेन के चालक राकेश द्वारा दी गई सूचना पर अधिकारियों में हड़कंप मच गया और लगभग 40 मिनट बाद ही रेलवे के सीनियर डीएमई आर के कौशिक, सीडीओ डीसी शर्मा, आरपीएफ एसपी आरसी जोशी सहित आलाधिकारी सम्बंधित कर्मचारियों को लेकर मौके पर पहुंच गये। लगभग दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पटरी से उतरे पहियों को मशीनों के माध्यम से ट्रैक पर चढ़ाया गया। उसके बाद अधिकारियों ने मालगाड़ी को वापस स्टेशन पर ही खड़ा करा दिया गया है।

– नुसरत अब्बासी